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विश्व सोरायसिस दिवस : त्वचा के चकत्तों से परे, व्यक्ति के सपनों को पहचानिए

विश्व सोरायसिस दिवस : त्वचा के चकत्तों से परे, व्यक्ति के सपनों को पहचानिए

जयपुर, 28 अक्टूबर 2026 — विश्व सोरायसिस दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान अस्पताल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के दिग्गजों ने सोरायसिस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बीमारी के लक्षणों, भ्रांतियों, आधुनिक उपचार और प्राथमिक बचाव पर विस्तार से चर्चा की।

1. सोरायसिस के लक्षण और व्यापक प्रभाव

राजस्थान हॉस्पिटल के स्किन सेंटर के प्रमुख एवं वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. दिनेश माथुर ने बताया कि सोरायसिस एक दीर्घकालिक, प्रतिरक्षा-जनित सूजन संबंधी रोग है।

प्रमुख लक्षण : त्वचा पर लाल या गहरे रंग के उभरे हुए चकत्ते, सफेद पपड़ी, खुजली और कभी-कभी दर्द या जलन।

प्रभावित अंग : यह सिर की त्वचा, कोहनी, घुटनों, हथेलियों, तलवों और नाखूनों को प्रभावित कर सकता है।

2. अन्य स्वास्थ्य जोखिम और गंभीर बीमारियां

आई.एम.ए. के पूर्व अध्यक्ष एवं राजस्थान अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने बताया कि भारतवर्ष में 2 करोड़ से ज्यादा लोग इस रोग से प्रभावित हैं। एस.एम.एस. अस्पताल के पूर्व अधीक्षक एवं दमा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने चेताया कि सोरायसिस केवल त्वचा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण जोड़ों में दर्द (अर्थराइटिस), उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इसलिए समय रहते इसका निदान और समग्र स्वास्थ्य जाँच बेहद जरूरी है।

3. सोरायसिस से जुड़े प्राथमिक बचाव एवं सावधानियां

विशेषज्ञों ने बीमारी से बचाव और इसके नियंत्रण के लिए निम्नलिखित सावधानियों पर जोर दिया:

नियमित चिकित्सकीय निगरानी : रोग की दीर्घकालिक प्रकृति को देखते हुए डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी उपचार बीच में न रोकें।

स्टेरॉयड के दुष्प्रभावों से बचें : बिना विशेषज्ञ की सलाह के स्टेरॉयड या अन्य दवाइयों का मनमाने ढंग से उपयोग बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।

जीवनशैली में सुधार: नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, धूम्रपान से पूरी तरह परहेज और तनाव प्रबंधन (Stress Management) अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।

4. भ्रांतियां और सामाजिक दृष्टिकोण

डॉ. माथुर ने स्पष्ट किया कि सोरायसिस छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह छूने, साथ बैठने, हाथ मिलाने या भोजन साझा करने से नहीं फैलती।

अस्पताल के वाईस प्रेसिडेंट डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने समाज, परिवारों और शिक्षकों से अपील की कि वे रोगियों के साथ भेदभाव न करें। इस अवसर पर डॉ. दिनेश माथुर द्वारा तैयार पोस्टर और एक विस्तृत हिंदी मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया गया।

विशेष संदेश :

“सोरायसिस रोगी की त्वचा को प्रभावित कर सकता है, लेकिन उसकी प्रतिभा, क्षमता, सपनों और सम्मान को नहीं।”

“मेरी त्वचा को नहीं, मुझे पहचानिए। मेरे चकत्तों को नहीं, मेरे सपनों को देखिए।”

डॉ दिनेश माथुर मो 9829061176

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