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“सफेद दाग नहीं, सोच बदलने की आवश्यकता है”

विश्व विटिलिगो दिवस पर राजस्थान हॉस्पिटल में जागरूकता पोस्टर का विमोचन

“सफेद दाग नहीं, सोच बदलने की आवश्यकता है”

जयपुर, 25 जून। विश्व विटिलिगो दिवस के अवसर पर राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में विटिलिगो (सफेद दाग) के प्रति समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष पोस्टर एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं हॉस्पिटल के प्रेसिडेंट डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का मूल्य उसकी त्वचा के रंग से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और मानवीय गुणों से होता है। आज विश्व में लगभग 15 करोड़ और भारत में 5 करोड़ लोग विटिलिगो से प्रभावित हैं। रोग से कहीं अधिक, सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव उनके आत्मविश्वास को ठेस पहुँचाता है, जिसे वैज्ञानिक सोच से बदलना बेहद ज़रूरी है।

सीईओ डॉ. विजय सारस्वत ने समाज से अंधविश्वास दूर करने और रोगियों का मनोबल बढ़ाने में ऐसे अभियानों की भूमिका को रेखांकित किया।

चिकित्सा विशेषज्ञों की मुख्य बातें :

यह कोई अभिशाप नहीं : वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश माथुर ने स्पष्ट किया कि विटिलिगो एक असंक्रामक (Non-Contagious) ऑटोइम्यून स्थिति है। यह किसी पाप, छुआछूत या खान-पान से नहीं फैलता।

प्रभावी उपचार संभव : वर्तमान में फोटोथेरेपी, लेजर और नई JAK Inhibitors दवाओं जैसी अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं।

पहचान और परामर्श : यदि दाग में सुन्नपन हो, तो वह कुष्ठ रोग का संकेत हो सकता है। बिना डरे या शरमाए तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।

संदेश : विटिलिगो ग्रसित लोगों को भेदभाव नहीं, बल्कि समाज में सम्मान, संवेदनशीलता और समान अवसर की आवश्यकता है।

संपर्क सूत्र डॉक्टर दिनेश माथुर 98290 61176

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