राजस्थान हॉस्पिटल में डॉक्टर्स डे पर चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और जागरूकता का अनूठा संगम

राजस्थान हॉस्पिटल में डॉक्टर्स डे पर चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और जागरूकता का अनूठा संगम
हरपीज़ ज़ोस्टर एवं हृदय रोगों के संबंध पर विशेषज्ञों ने साझा किए नवीनतम वैज्ञानिक तथ्य,
“स्वस्थ महिला–स्वस्थ परिवार–स्वस्थ राष्ट्र” पोस्टर का हुआ विमोचन

जयपुर, 1 जुलाई।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य जागरूकता तथा चिकित्सकों के सम्मान को समर्पित एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा में रोकथाम की बढ़ती भूमिका पर बल देते हुए समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर राजस्थान हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि
“चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करते, बल्कि आशा, विश्वास और मानवता की रक्षा भी करते हैं। समाज का स्वस्थ भविष्य डॉक्टरों की निष्ठा, सेवा और करुणा पर आधारित है।”
राजस्थान हॉस्पिटल के अध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने भी अपने संदेश में कहा कि
“आज का चिकित्सक केवल उपचारकर्ता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का मार्गदर्शक भी है। आधुनिक चिकित्सा का लक्ष्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना होना चाहिए।”
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन उपाध्यक्ष डॉ. सर्वेश अग्रवाल, लंग सेंटर निदेशक डॉ. शीतू सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा आचार्य, वाइस चेयरमैन डॉ. रविन्द्र सिंह राव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विजय सारस्वत , रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एम. बटवारा, त्वचा रोग विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. दिनेश माथुर तथा अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “हरपीज़ ज़ोस्टर एवं हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों के बीच संबंध” विषय पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ पैनल चर्चा रही। चर्चा का संचालन डॉ. दिनेश माथुर ने किया जबकि प्रमुख पैनलिस्ट के रूप में डॉ. रविन्द्र सिंह राव, डॉ. कैलाश चन्द्र तथा डॉ. ए.डी. माथुर ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
चर्चा के प्रारंभ में डॉ. दिनेश माथुर ने कहा कि
चिकित्सा विज्ञान में हरपीज़ ज़ोस्टर को लेकर हमारी समझ में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि हरपीज़ ज़ोस्टर केवल त्वचा अथवा नसों का संक्रमण नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाला रोग है जिसके महत्वपूर्ण हृदय एवं रक्तवाहिनी संबंधी प्रभाव भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि चिकनपॉक्स का वायरस वर्षों तक शरीर में सुप्त रहने के बाद पुनः सक्रिय होकर केवल नसों को ही नहीं बल्कि रक्त वाहिनियों को भी प्रभावित कर सकता है। इस पर बोलते हुए ह्रदय रोग विशेषग्य रविन्द्र सिंह राव ने कहा कि अन्य संक्रमणों की तर्ज पर इससे व्यापक सूजन, रक्तवाहिनियों की भीतरी परत (एंडोथीलियम) को क्षति, रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति तथा पहले से मौजूद एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक के अस्थिर होने जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, जो हृदयाघात एवं स्ट्रोक जैसी गंभीर घटनाओं का भी कारण बन सकती हैं।
मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रविन्द्र सिंह राव के विचार
अनेक अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से मालूम हुआ है कि हरपीज़ ज़ोस्टर होने के बाद स्ट्रोक तथा हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है। यह खतरा दाने निकलने के पहले सप्ताह में सर्वाधिक होता है, किंतु कई रोगियों में यह बढ़ा हुआ जोखिम कई महीनों अथवा वर्षों तक बना रह सकता है।
डॉ राव ने बताया कि यह संबंध द्विदिश है। जिन व्यक्तियों को पहले से कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, हार्ट फेल्योर, मधुमेह अथवा उच्च रक्तचाप जैसी हृदय संबंधी बीमारियाँ हैं, उनमें हरपीज़ ज़ोस्टर होने की संभावना भी अधिक रहती है तथा संक्रमण के बाद जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक निवारक हृदय चिकित्सा में अब केवल रक्तचाप, मधुमेह एवं कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों, विशेषकर हरपीज़ ज़ोस्टर की रोकथाम भी हृदय स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण हो सकता है !
इस अवसर पर “स्वस्थ महिला, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ राष्ट्र के लिए सात महत्वपूर्ण बातें” विषय पर डॉ वीणा आचार्य द्वारा तैयार जनस्वास्थ्य पोस्टर का विमोचन डॉ. सर्वेश अग्रवाल, डॉ. विजय सारस्वत , डॉ. रविन्द्र सिंह राव एवं डॉ. राघव शाह एव डॉ शीतू सिंह द्वारा किया गया, पोस्टर की संकल्पना एवं तैयारी डॉ. वीणा आचार्य द्वारा की गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी सरल, व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक संदेशों को समाज तक पहुँचाना है। पोस्टर के सात प्रमुख संदेशों पर विशेषज्ञों ने संक्षिप्त व्याख्यान भी दिए।
डॉ. तरु छाया के व्यक्तव्य
आपने महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक महिला को अपना हीमोग्लोबिन नियमित रूप से जाँचते रहना चाहिए तथा इसे 12 ग्राम या उससे अधिक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त हीमोग्लोबिन स्वस्थ, ऊर्जावान एवं कार्यक्षम जीवन का आधार है।
डॉ. अनन्या पारीक के व्यक्तव्य
उन्होंने प्रत्येक महिला से माह में एक बार स्वयं स्तन परीक्षण करने का आग्रह करते हुए कहा कि स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान से उपचार की सफलता कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. वीणा आचार्य के व्यक्तव्य
उन्होंने किशोरियों एवं महिलाओं में एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर टीकाकरण गर्भाशय ग्रीवा सहित अनेक कैंसरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने साथ ही संस्थागत प्रसव को सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ शिशु के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
डॉ. शीतू सिंह के व्यक्तव्य
संतुलित एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर आहार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन A, D, B12 तथा जिंक से युक्त भोजन महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. पूजा जांगिड़ के व्यक्तव्य
उन्होंने प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करने की सलाह देते हुए कहा कि सक्रिय जीवनशैली न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. राघव शाह के व्यक्तव्य
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की आधारशिला केवल अच्छा स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि अच्छे संस्कार एवं जीवन-मूल्य भी हैं। उन्होंने परिवारों में सम्मान, ईमानदारी, सहयोग, दया एवं करुणा जैसे मूल्यों के विकास को स्वस्थ एवं समृद्ध राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के सयोंजक डॉ दिनेश माथुर ने सभी लोगो को धन्यवाद ज्ञापित किया।
डॉ दिनेश माथुर
9829061176



