विशेष
चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
क्राइम

जयपुर : भंडारी अस्पताल में करोड़ों का ‘खेल’, 

 

जयपुर : भंडारी अस्पताल में करोड़ों का ‘खेल’, 

एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट ने डॉक्टर और मरीजों को लगाया 90 लाख का चूना

जयपुर। राजधानी के प्रतिष्ठित भंडारी अस्पताल और रिसर्च सेंटर में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अस्पताल के ही एक एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट ने डॉक्टर और प्रबंधन की जानकारी के बिना मरीजों से लाखों रुपये अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आरोपी : मनीष (एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट), जो साल 2019 से अस्पताल में कार्यरत था।

धोखाधड़ी की राशि : लगभग 80 से 90 लाख रुपये।

शिकायतकर्ता: डॉ. कांति मल भंडारी, मैनेजिंग डायरेक्टर (भंडारी अस्पताल)।

कैसे खुला धोखाधड़ी का राज ?

धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज कमल किशोर ने अस्पताल के टेलीकॉलर को बताया कि मनीष ने उनसे दवाइयों के पैसे अस्पताल के बजाय सीधे अपने निजी खाते में मंगवाए हैं। जब अस्पताल प्रबंधन (डॉ. गंगा) ने इसकी जांच की, तो पता चला कि यह कोई पहली बार नहीं था। मनीष ने लगभग 400 से 500 मरीजों से उनके इलाज और दवाओं के पैसे अवैध रूप से अपने खातों में जमा करवाए थे।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi):

आरोपी मनीष ने जालसाजी के लिए कई गंभीर तरीके अपनाए:

नकली बिल और इनवॉइस तक बना डाले :

मनीष ने ‘जय भवानी फार्मेसी’ के नाम पर फर्जी GST बिल बनाए। उसने नेशनल बायोटेक और सोल्विमेड फार्मा जैसी कंपनियों के नाम पर फर्जी इनवॉइस बनाकर अस्पताल को सप्लाई दिखाई और पैसे हड़प लिए।

इतने बड़े हॉस्पिटल में ऐसा भी फर्जी ईमेल और वेबसाइट :

आरोपी ने refrens.com पर अस्पताल का फर्जी अकाउंट बनाया और वहां से मरीजों को फर्जी बिल भेजे।

हैरानी की बात डॉक्टर बनकर ली फीस 

आरोपी खुद डॉक्टर बनकर मरीजों से कंसल्टेशन फीस भी वसूलता रहा, जबकि डॉ. चिराग भंडारी को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप :

उसने अस्पताल के लेटर हेड और सील (मोहर) का दुरुपयोग किया ताकि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा सकें।

आरोपी ने आरोप स्वीकार भी किया था फिर ऐसा क्यों हुआ :

जब 23 मार्च, 2026 को मनीष से पूछताछ की गई, तो उसने लिखित में स्वीकार किया कि पिछले 6 महीनों में उसने लगभग ₹7,000 की चोरी की है और बाद में ₹7,000 डॉ. चिराग भंडारी के पेटीएम में वापस भी डाले। हालांकि, विस्तृत जांच में यह मामला करीब 90 लाख रुपये की बड़ी गबन का निकला।

डॉ. कांति मल भंडारी की शिकायत पर सांगानेर थाना/साइबर क्राइम सेल ने आरोपी मनीष के खिलाफ धारा 318(4), 316(4), 338, 336(3), 340(2) BNSS और 66D आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसीपी चंद्र प्रकाश मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं।

सावधान किया :

अस्पताल प्रशासन ने मरीजों से अपील की है कि किसी भी भुगतान के लिए केवल अधिकृत काउंटर या अस्पताल के आधिकारिक खातों का ही उपयोग करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Articles

Back to top button