“दिल को दवा से नहीं, अनुशासित जीवनशैली से सबसे ज्यादा संरक्षण मिलता है।”
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दवा से ज्यादा असर हमारी दिनचर्या, खान-पान, नींद और तनाव पर नियंत्रण का : डॉ सुनील जैन

असली भोजन—सब्ज़ियाँ, मेवे, हेल्दी फैट, और संतुलित प्रोटीन—हृदय को सुरक्षित रखने की कुंजी है।
जयपुर | हृदय रोग आज देश में सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है, लेकिन जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके इसे प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील जैन का कहना है कि “दवा से ज्यादा असर हमारी दिनचर्या, खान-पान, नींद और तनाव पर नियंत्रण का होता है। यदि हम अपने रोजमर्रा के व्यवहार को सही दिशा दें, तो दिल लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।”
डॉ. सुनील जैन बताते हैं कि नियमित फिजिकल एक्टिविटी इस ‘हार्ट रीसेट’ का पहला आधार है। उनका कहना है कि रोजाना 30 मिनट की तेज़ चाल से चलना हृदय और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, वजन नियंत्रित रखता है और रक्तप्रवाह में सुधार करता है। “जिम में घंटों बिताने की जरूरत नहीं, बस निरंतर हलचल जरूरी है,” वे जोड़ते हैं।
तनाव को हृदय रोग का बड़ा कारक बताते हुए डॉ. जैन राजयोग मेडिटेशन को अत्यंत प्रभावी बताते हैं। यह मानसिक शांति देता है, सूजन कम करता है और तनाव हार्मोन्स पर नियंत्रण रखकर दिल की रक्षा करता है।
पर्याप्त नींद को वे तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हैं—“7–8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है, शरीर की मरम्मत को सक्षम बनाती है और हृदय को आराम देती है।”
डॉ. सुनील जैन चेताते हैं कि आज लगभग 67% दैनिक भोजन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड होता है, जो रंग, फ्लेवर और प्रेज़र्वेटिव से भरा रहता है। वह सरल नियम बताते हैं—“किसी पैक्ड फूड में पाँच से अधिक सामग्री हो तो समझें कि वह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड है, और उससे दूरी बनाना ही बेहतर है।”
वे जोर देकर कहते हैं कि असली भोजन—सब्ज़ियाँ, मेवे, हेल्दी फैट, और संतुलित प्रोटीन—हृदय को सुरक्षित रखने की कुंजी है।
डॉ. जैन का संदेश स्पष्ट है कि
“दिल को दवा से नहीं, अनुशासित जीवनशैली से सबसे ज्यादा संरक्षण मिलता है।”
संपर्क सूत्र : डॉ सुनील जैन मो 94140 63035



