दिल के दौरे में “गोल्डन ऑवर” का महत्व — 14 वर्षीय बच्चे की मौत ने जगाई चेतना

दिल के दौरे में “गोल्डन ऑवर” का महत्व — 14 वर्षीय बच्चे की मौत ने जगाई चेतना
बेंगलुरु/जयपुर। कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के बानल्ली गांव में 14 वर्षीय प्रीतम की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत ने चिकित्सा जगत और समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, प्रीतम घर लौटते समय रास्ते में सीने में दर्द से तड़पते हुए गिर पड़ा और मौके पर ही दम तोड़ दिया।
चिकमगलूर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया।

इस घटना पर प्रियंका हॉस्पिटल के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष जोशी ने कहा,
> “हमारे देश में आज भी हार्ट अटैक को लेकर अज्ञानता बहुत अधिक है। समय पर अस्पताल न पहुंच पाना ही अकाल मृत्यु का प्रमुख कारण है। यदि प्रीतम को दिल का दौरा पड़ने के बाद गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार मिल जाता, तो उसकी जान बच सकती थी।”
क्या है गोल्डन ऑवर?
दिल का दौरा पड़ने के बाद पहला एक घंटा जीवन बचाने में बेहद अहम माना जाता है। इस दौरान तुरंत जांच और प्राथमिक उपचार — जैसे ईसीजी, एंजियोप्लास्टी या थ्रॉम्बोलाइसिस — देने से हृदय की मांसपेशियों को नुकसान से बचाया जा सकता है और मृत्यु का खतरा कई गुना कम हो जाता है।
समय पर इलाज के सकारात्मक उदाहरण
*प्रियंका हॉस्पिटल – PHCC में डॉ. पियूष जोशी* की टीम ने रक्षाबंधन के दिन तीन गंभीर हार्ट अटैक मरीजों का प्राइमरी एंजियोप्लास्टी द्वारा सफल इलाज किया।
44 वर्षीय पुरुष — 100% ब्लॉक LCx,
76 वर्षीय पुरुष — 100% ब्लॉक RCA,
35 वर्षीय पुरुष — 100% ब्लॉक LAD।
तीनों को समय पर लाकर गोल्डन ऑवर में इलाज शुरू किया गया* और आज वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
डॉ. शर्मा ने अपील की कि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पसीना या बेहोशी को कभी नज़रअंदाज न करें।
> “जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा, उतनी अधिक संभावना है कि उसकी जान बचाई जा सके।”
संपर्क सूत्र न 98290 11567, 9829025555



