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मातृत्व का नया सवेरा : जहाँ जोखिम हार जाता है और मुस्कान जीत जाती है

माँ बनना जीवन का सबसे सुंदर स्वप्न है

मातृत्व का नया सवेरा : जहाँ जोखिम हार जाता है और मुस्कान जीत जाती है

एक स्त्री के लिए माँ बनना केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व का पूर्ण होना है। नौ महीने तक अपनी कोख में एक नन्हीं जान को सींचना, उसकी हर धड़कन को महसूस करना और उसे इस दुनिया में लाने के सपने बुनना—यह दुनिया का सबसे सुखद अहसास है। लेकिन सोचिए, उस माँ के दिल पर क्या बीतती होगी, जब प्रसव की घड़ी निकट हो और उसे बताया जाए कि उसकी गर्भावस्था ‘हाई रिस्क’ है?

अक्सर संसाधनों और विशेषज्ञता के अभाव में छोटे अस्पताल हाथ खड़े कर देते हैं। एक लाचार पिता और दर्द से जूझती माँ जब एम्बुलेंस के सायरन के बीच एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते हैं, तो वह दृश्य अत्यंत हृदयविदारक होता है। कुशल हाथों के अभाव में अगर बच्चा समय से पूर्व (Preterm) जन्म ले ले या कोई अनहोनी हो जाए, तो वह घाव जीवनभर नहीं भरता।

विशेषज्ञता की छांव में सुरक्षित मातृत्व

प्रियंका हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर की हाई रिस्क प्रेगनेंसी विशेषज्ञ डॉ. आशा शर्मा कहती हैं, “हाई रिस्क डिलीवरी महज एक मेडिकल केस नहीं, एक नहीं बल्कि दो जिंदगी बचाने की जद्दोजहद है। यहाँ केवल अनुभव नहीं, बल्कि एक ‘सुरक्षा चक्र’ की जरूरत होती है।”

एक सफल प्रसव के पीछे इन तीन स्तंभों की मज़बूती होती है :

1. मल्टी-डिस्पिलिनरी कवच : यहाँ केवल गायनेकोलॉजिस्ट नहीं, बल्कि जटिलताओं से लड़ने के लिए अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट और एनेस्थीसिया एवं पीडियाट्रिशन विशेषज्ञों की टीम हर पल तैनात रहती है।

2. सांसों पर पहरा : प्रसव के दौरान माँ के हृदय और बच्चे की धड़कन की सेकंड-दर-सेकंड निगरानी की जाती है।

3. जीवन रक्षक तकनीक : अत्याधुनिक ब्लड बैंक, ICU और समय पूर्व जन्मे बच्चों के लिए उन्नत NICU की उपलब्धता ही वह फर्क है, जो डर को जीत में बदल देती है।

अब डर नहीं, विश्वास का उदय होगा

हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक और प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जी एल शर्मा एक नई उम्मीद जगाते हुए कहते हैं, “हाई रिस्क प्रेगनेंसी अब कोई अभिशाप या डर का कारण नहीं है। जब तकनीक और संवेदनाएं एक साथ मिलती हैं, तो हर मुश्किल केस एक सुखद अनुभव में बदल सकता है।”

एक माँ की गोद सूनी न रहे और हर घर में किलकारी गूंजे, इसी संकल्प के साथ प्रियंका हॉस्पिटल कार्य कर रहा है। अब किसी माँ को अस्पताल दर अस्पताल भटकने की जरूरत नहीं है। यह उन सभी परिवारों के लिए एक ‘नए सूर्य के उदय’ जैसा है, जो अब तक जोखिम के अंधेरे से डरे हुए थे। सही समय पर लिया गया फैसला और विशेषज्ञों का साथ—यही वह सूत्र है जो मातृत्व के इस सफर को सुरक्षित और स्मरणीय बनाता है।

क्योंकि हर नन्हीं जान और हर माँ की मुस्कान अनमोल है।

संपर्क सूत्र डॉ आशा शर्मा मो +917073555581

डॉ जी एल शर्मा मो 982-901-1567

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