महिला शक्ति धन और विधा की दात्री है और उनका सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विचार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है
महिला शक्ति धन और विधा की दात्री है और उनका सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विचार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है
जयपुर दिनाक 7 मार्च 2026
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर महिलाओं के अधिकार, स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान अस्पताल में एक विशेष पोस्टर विमोचन एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि महिला शक्ति धन और विधा की दात्री है और उनका सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विचार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है उन्होंने कहा कि जब समाज महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देता है, तब ही समाज में वास्तविक प्रगति और संतुलन स्थापित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा, शिक्षा का विस्तार और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राजस्थान अस्पताल के प्रेसिडेंट डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता का भाव समाज की संस्कृति और सभ्यता का दर्पण होता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को महिलाओं के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जाए, ताकि हर महिला सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।
इस अवसर पर राजस्थान अस्पताल के वाईस प्रेसिडेंट डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर देना केवल सामाजिक न्याय ही नहीं बल्कि विकास की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस वर्ष महिला दिवस की वैश्विक थीम “Give to Gain – Rights, Justice, Action for All Women and Girls” सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, न्याय, एव कार्रवाई” रही, जिसके अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं को अधिकार, न्याय और अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम की मुख्य संयोजक डॉ.वीणा आचार्य चेयरपर्सन इंडियन कॉलेज ऑफ़ मदर एंड चाइल्ड हेल्थ ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं बल्कि एक संकल्प का दिन है। उन्होंने कहा कि वर्षों से महिलाओं के स्वास्थ्य, विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, टीकाकरण, स्क्रीनिंग और जागरूकता के क्षेत्र में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। और अन्ततोगत्वा प्रधान मत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अभी हाल ही में महिलाओं के गर्भाशय के मुख के कैंसर जो की एक मात्र ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन द्वारा बचाया जा सकता है उसे किशोरियों देने के लिए पूर्णतया निशुल्क जारी किया इस अनूठी पहल से महिलाओं को स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान करने एव आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने का एक अनमोल कार्य किया है डॉ आचार्य ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस आयोजन ने समाज को यह प्रेरणा दी कि महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा और समान अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों में स्वास्थ्य की महत्ता पर भी प्रकाश डाला तथा एनीमिया, कुपोषण के बारे में डॉ नीलम जैन ने जानकारी दी और कहा कि शसक्त महिलाओ को वंचित महिलाओ के लिए कार्यवाही करनी चाहिए और उनके उत्थान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए
डॉ मधुलिका ने कहा कि रजोनिवृत्ति जीवन का अंत नहीं है, बल्कि जीवन की एक नई शुरुआत है, जहाँ नारी अपने सभी बंधनों से मुक्त होकर नई उड़ान भरती है।
डॉ अंशु पटोदिया ने कहा कि यह जीवन की नई शुरुआत है नयी उमंगें हैं आशाएँ हैं और अपने बारे में सोचने का समय भी है
डॉ तरु छाया ने अनीमिया में होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी दी
कार्यक्रम में सयुंक्त रूप से जोर देकर यह संदेश दिया कि — “जब महिलाओं को अधिकार मिलते हैं, तो समाज को प्रगति मिलती है जब महिलाओं को न्याय मिलता है, तो राष्ट्र को शक्ति मिलती है और जब महिलाओं के लिए कार्य होता है, तो भविष्य सुरक्षित बनता है।” “नारी सशक्त होगी तो राष्ट्र समृद्ध होगा।”
डॉ आचार्य द्वारा इस अवसर पर जारी किए गए जागरूकता पोस्टर के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि महिलाओं के सशक्तिकरण से ही परिवार, समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति संभव है।
कार्यक्रम के संयोंजक स्त्री रोग विशेषग्य डॉ वीणा आचार्य ने बताया कि कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, समान अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
डॉ दिनेश माथुर
9829061176