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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
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16वीं विश्व कांग्रेस एवं 24वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की नई दिशा तय कर सफलतापूर्वक संपन्न

नार्चीकॉन 2025 का भव्य समापन

16वीं विश्व कांग्रेस एवं 24वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की नई दिशा तय कर सफलतापूर्वक संपन्न

जयपुर, 21 सितम्बर 2025।

नार्ची कॉन 2025 का समापन अकादमिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संगम के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं एम्स जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह रहा मुख्य आकर्षण

सम्मेलन के दौरान आयोजित दीक्षांत समारोह में NARCHI के डिप्लोमा कार्यक्रमों – Dip.GO, Dip.CH एवं DRCH के प्रशिक्षु चिकित्सकों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

प्रमाणपत्र वितरण में मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल के साथ डॉ. वीणा आचार्य, डॉ. एस. डॉन, डॉ. डांगी एवं डॉ. मंजू पुरी भी शामिल रहे।

मुख्य अतिथि का प्रेरक संदेश

अपने संबोधन में डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने कहा:

> “नार्ची सदैव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सेवा में अग्रणी रहा है। यह प्रमाणपत्र केवल डिग्री नहीं, बल्कि समाज की सेवा का आजीवन वचन है। युवा चिकित्सकों को चाहिए कि वे लगातार सीखते रहें, ईमानदारी व नैतिकता के साथ कार्य करें और मानवता व करुणा का भाव कभी न खोएं।

प्रजनन चिकित्सा में नई पहल

सम्मेलन के दौरान NARCHI ने प्रजनन चिकित्सा (Reproductive Medicine) में एक वर्ष की अवधि का विशेष फेलोशिप कार्यक्रम प्रारंभ किया।

मास्टर सेंटर : लखनऊ

रीजनल सेंटर्स : विभिन्न राज्यों में स्थापित किए जाएंगे

राजस्थान में संचालन : डॉ. गुंजन जैन (जैन फर्टिलिटी सेंटर) को जिम्मेदारी सौंपी गई

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में डॉ. सुभ्रता डॉन, संतोष शुक्ला, डॉ. विशाल श्रीवास्तव और डॉ. वीणा आचार्य की सक्रिय भागीदारी रही।

वैज्ञानिक सत्र और व्याख्यान

सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार प्रस्तुत किए, जिनमें शामिल रहे:

भ्रूणीय विकास, मूत्र असंयम, एनीमिया, स्तनपान, नवजात पोषण, आर.एच. रोग, गर्भावस्था जन्य पित्त विकार

विशेष व्याख्यान : एचपीवी टीकाकरण से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम, योनि प्रोलैप्स शल्य चिकित्सा की नई तकनीकें और स्त्रीरोग शल्य चिकित्सा का इतिहास

अन्य प्रस्तुतियाँ : मातृ मृत्यु दर, रक्त उपयोग, एंडोमेट्रियोसिस, पी.आर.पी., माइक्रोवेव एब्लेशन, स्तन कैंसर, ट्रॉफोब्लास्टिक ट्यूमर आदि

सम्मान और अभिनंदन

समापन समारोह में नार्ची मुख्यालय के अधिकारियों ने आयोजन समिति के सभी सदस्यों को सम्मानित किया।

देशभर से आए विशेषज्ञों ने इस आयोजन को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य क्षेत्र में एक “यादगार अकादमिक पर्व” करार दिया। संपर्क सूत्र डॉ दिनेश माथुर मो 9829061176

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