विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस पर जनस्वास्थ्य संकट पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस पर जनस्वास्थ्य संकट पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
जयपुर, 29 जनवरी 2026
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर मनाये जाने वाले विश्व कुष्ठ रोग दिवस की पूर्व संध्या पर आज जयपुर स्थित राजस्थान अस्पताल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों’ (Neglected Tropical Diseases – NTDs) के प्रति समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र का ध्यान आकर्षित करना था।

NTD : समाज के अंतिम छोर तक पहुँचने वाला संकट
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राजस्थान अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में आज भी कई बीमारियाँ चुपचाप समाज के सबसे कमजोर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यूएई (UAE) के आह्वान पर वर्ष 2020 से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रतिवर्ष 30 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है ताकि इन उपेक्षित रोगों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके।
प्रमुख विशेषज्ञों के विचार और रोगों का विश्लेषण
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान अस्पताल के प्रेसिडेंट डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि WHO ने ऐसी 20 बीमारियों को NTD की श्रेणी में रखा है, जो मुख्यतः गरीबी, गंदगी, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जुड़ी हैं।
विभिन्न विशेषज्ञों ने इन बीमारियों के भार और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की:
कुष्ठ रोग (Leprosy): कार्यक्रम संयोजक एवं त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश माथुर ने कहा कि भारत में विश्व के लगभग 60% नए कुष्ठ रोगी पाए जाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि त्वचा पर सुन्न चकत्ते और नसों का मोटा होना इसके शुरुआती लक्षण हैं, जिन्हें सही समय पर पहचान कर अंगों की विकृति से बचा जा सकता है।
हाथीपांव (Lymphatic Filariasis) : वाइस चेयरमैन डॉ. रविंद्र सिंह राव ने बताया कि भारत दुनिया के 40% फाइलेरिया रोगियों का घर है। यह बीमारी शरीर में स्थायी सूजन पैदा कर व्यक्ति को आर्थिक रूप से अक्षम बना देती है।
डेंगू और चिकनगुनिया : डॉ. अशोक दत्त माथुर ने मानसून के दौरान इन बीमारियों के महामारी बनने और रोकथाम की आवश्यकता पर बल दिया।
रेबीज : लंग सेंटर की डायरेक्टर डॉ. शीतू सिंह ने चेतावनी दी कि भारत में कुत्ते के काटने से होने वाली रेबीज मृत्यु दर विश्व में सर्वाधिक है, जिसे समय पर टीकाकरण से शत-प्रतिशत रोका जा सकता है।
कृमि संक्रमण और सर्पदंश : डॉ. दीपचंद खंडेलवाल ने बच्चों में कुपोषण के पीछे कृमि संक्रमण को जिम्मेदार बताया, वहीं डॉ. नूतन कटेवा ने सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुँचने की अनिवार्यता बताई।
उन्मूलन की ओर बढ़ते कदम
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. करिश्मा गोयल ने आशा की किरण दिखाते हुए बताया कि भारत ने ट्रेकोमा जैसे रोग के उन्मूलन में सफलता प्राप्त की है, जो यह सिद्ध करता है कि ठोस नीति से इन रोगों को हराया जा सकता है।
सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य
वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सर्वेश अग्रवाल और डॉ. विजय सारस्वत ने रेखांकित किया कि इन रोगों का समाधान केवल दवाओं में नहीं, बल्कि स्वच्छता, पोषण और जन-जागरूकता में निहित है। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न है।”
विशेष विमोचन
इस अवसर पर डॉ. वीणा आचार्य द्वारा तैयार किए गए जागरूकता पोस्टरों एवं डॉ. दिनेश माथुर द्वारा लिखित सूचनात्मक पुस्तिका का विमोचन किया गया। यह सामग्री आम जनमानस को इन बीमारियों के लक्षणों और बचाव के प्रति शिक्षित करने में सहायक होगी।



