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जयपुर में 19 से 21 सितम्बर तक होगा नार्चीकॉन 2025 का भव्य आयोजन

जयपुर में 19 से 21 सितम्बर तक होगा नार्चीकॉन 2025 का भव्य आयोजन
जयपुर। वर्ल्ड कांग्रेस नार्चीकॉन 2025 का आयोजन इस वर्ष 19 से 21 सितम्बर 2025 तक जयपुर में किया जा रहा है। यह आयोजन नेशनल एसोसिएशन फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ ऑफ इंडिया (NARCHI) की 16वीं विश्व कांग्रेस तथा 24वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस है।
इस तीन दिवसीय शैक्षणिक महोत्सव में देश-विदेश से प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, नवजात शिशु विशेषज्ञ तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मी भाग लेंगे।
इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना, नवीनतम शोध एवं तकनीकों का आदान-प्रदान करना तथा जमीनी स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
सम्मेलन की वैज्ञानिक गतिविधियों में प्रथम दिन विशेष आकर्षण आठ कार्यशालाएँ अलग अलग संस्थानों में होंगी , जिनमें विशेषज्ञ चिकित्सक अलग-अलग विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
1. डॉ. वीणा आचार्य आयोजक समिति की अध्यक्ष ने कहा कि “नार्चीकॉन 2025 की कार्यशालाएँ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में नए मानदंड स्थापित करेंगी। जयपुर में यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों और देश के युवा डॉक्टरों को एक मंच पर लाएगा।

भ्रूण चिकित्सा से लेकर प्रिवेन्टिव ऑन्कोलॉजी और एस्थेटिक गायनेकोलॉजी तक हर पहलू पर गहन चर्चा और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण होगा। हमें गर्व है कि यह सम्मेलन ज्ञान, अनुभव और करुणा का संगम बनेगा।”
2. डॉ. नीलम जैन बताती हैं, “19 सितम्बर को प्रतिभागियों को लाइव डेमो, केस डिस्कशन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का अनूठा संगम मिलेगा। फीटल मेडिसिन वर्कशॉप में एनॉमली स्कैन और फीटल इको, इंफर्टिलिटी वर्कशॉप में पीसीओएस और मेल फैक्टर, जबकि यूरो-गायनी सत्र में रोबोटिक सर्जरी और जेंडर अफर्मेशन सर्जरी जैसे विषय शामिल होंगे। यह अनुभव युवाओं से लेकर वरिष्ठ चिकित्सकों तक सभी के लिए नई दिशा तय करेगा।”

3. डॉ. मधुलिका अग्रवाल – आयोजक सचिव का कहना है, “यह सम्मेलन केवल ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं करेगा, बल्कि समाज और चिकित्सा समुदाय के बीच सेतु भी बनेगा।

इंफर्टिलिटी और प्रिवेन्टिव ऑन्कोलॉजी जैसी कार्यशालाएँ व्यावहारिक समाधान पेश करेंगी। कैंसर से बचाव पर आधारित प्रशिक्षण समाज को एक सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएगा।”
4. डॉ. तरू छाया आयोजक सचिव ने बताया, “ऑब्स्टेट्रिक ड्रिल्स और स्किल एन्हैंसिंग CME इस आयोजन की धड़कन होंगी। नर्सिंग स्टाफ और युवा स्त्रीरोग विशेषज्ञों को आपात स्थितियों से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। PPH मैनेजमेंट, शोल्डर डिस्टोसिया और मैटरनल कोलैप्स जैसे विषयों पर अभ्यास आने वाले समय में अनगिनत माताओं और शिशुओं की जान बचाएगा।”
5. डॉ. दीपा मसन्द ने बताया कि “यूरो-गायनी और एस्थेटिक गायनेकोलॉजी जैसी उन्नत शाखाएँ इस सम्मेलन की विशेष पहचान होंगी। रोबोटिक सर्जरी, रीजेनेरेटिव मेडिसिन, लेजर और PRP थेरेपी पर चर्चाएँ होंगी। इस प्रकार नर्चिकॉन 2025 स्त्री स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के नए अध्याय की ओर कदम बढ़ाएगा।”
6. डॉ. उषा शेखावत –ने कहा कि शब्दों में, “प्रिवेन्टिव ऑन्कोलॉजी वर्कशॉप इस आयोजन की आत्मा होगी। WHO की रणनीतियों से लेकर कोल्पोस्कोपी और LEEP तक का प्रशिक्षण प्रतिभागियों को कैंसर रोकथाम के प्रभावी हथियार देगा। यह पहल न केवल चिकित्सकों को सक्षम बनाएगी बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाएगी।”
7. पेरिनाटल-नियोनेटोलॉजी कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें डॉ. धनंजय के. मंगल, डॉ. दीपचंद खंडेलवाल, डॉ. रूपेश मसन्द और डॉ. वरुण शर्मा विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। इस कार्यशाला में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शिशु की देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के प्रबंधन और नवजात शिशुओं की आपात स्थितियों पर चर्चा होगी। यह कार्यशाला युवा स्त्रीरोग विशेषज्ञों और शिशु रोग चिकित्सकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
8. गर्भावस्था और प्रसव के दौरान उत्पन्न आपात स्थितियों का प्रबंधन कैसे किया जाए, इस पर आधारित ऑब्स्टेट्रिक ड्रिल्स कार्यशाला का संचालन डॉ. आशा वर्मा, डॉ. सीमा मेहता, डॉ. इन्द्रा लाम्बा और डॉ. शालिनी राठौड़ द्वारा किया जाएगा। इसमें पोस्टपार्टम हेमरेज (PPH), ईक्लेम्प्सिया और प्रसवकालीन जटिलताओं से निपटने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। यह कार्यशाला मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
9. बांझपन की समस्या आज के समय की बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसी विषय पर केंद्रित कार्यशाला में डॉ. नरेंद्र गुप्ता, डॉ. नीलम बापना, डॉ. अनीता शर्मा और डॉ. गुंजन जैन प्रतिभागियों को नवीनतम उपचार पद्धतियों से अवगत कराएँगे। इसमें आईवीएफ तकनीक, एग फ्रीजिंग, पुरुष बांझपन और एंडोक्राइन कारणों पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह कार्यशाला निःसंतान दंपतियों के लिए नई उम्मीदें जगाने का कार्य करेगी।
10. फीटल मेडिसिन : डॉ. सी. के. गर्ग, डॉ. अपार माथुर, डॉ. सविता बंसल और डॉ. सोनल गौर के मार्गदर्शन में फीटल मेडिसिन कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें भ्रूण के विकास संबंधी समस्याओं, जन्मजात विकृतियों की समय रहते पहचान और गर्भावस्था के दौरान उन्नत अल्ट्रासाउंड तकनीकों पर विशेष चर्चा होगी। इस कार्यशाला से युवा चिकित्सकों को भ्रूण चिकित्सा की नवीनतम प्रगति का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
11. स्त्रीरोग शल्यक्रिया के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती लैप्रोस्कोपी तकनीक को समझने और सीखने का अवसर इस कार्यशाला में मिलेगा।
डॉ. वी. नहटा, डॉ. फरेन्द्र भारद्वाज, डॉ. सुशीला सैनी और डॉ. कल्पना तिवारी प्रतिभागियों को हिस्टरोस्कोपी एवं लैप्रोस्कोपी की जटिलताओं और उनके समाधान से परिचित कराएँगे। यह कार्यशाला स्त्रीरोग विशेषज्ञों को सुरक्षित और प्रभावी शल्य तकनीकों की गहराई सिखाएगी।
12. स्त्रियों में बढ़ती यूरोगायनकोलॉजिकल समस्याओं जैसे यूटेरिन प्रोलैप्स, यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस आदि के प्रबंधन पर आधारित यह कार्यशाला अत्यंत प्रासंगिक है। इसमें डॉ. सुनंदन यादव, डॉ. इन्द्रा सरिन और डॉ. मयूरी कोठिवाला अपने अनुभव साझा करेंगे। यह सत्र महिलाओं की जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए चिकित्सकों को उन्नत और सुरक्षित इलाज की दिशा में प्रशिक्षित करेगा।
13. गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए कोलपोसकॉपी एक अहम तकनीक है। डॉ. चन्द्रकांत सुलानिया, डॉ. प्रियांका गोयल, डॉ. राजकुमारी सोनी, डॉ. सुमन चौधरी और डॉ. अपूर्वा टाक इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। इसमें एचपीवी संक्रमण, प्री-कैंसरस घावों की पहचान और उनकी स्क्रीनिंग तकनीकों पर विशेष जोर रहेगा। यह कार्यशाला “सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत” के राष्ट्रीय अभियान में एक मजबूत कदम होगी।
19 सितम्बर को जयपुर में आयोजित कार्यशालाएँ सात अलग-अलग विषयों पर केंद्रित होंगी:
• फीटल मेडिसिन – भ्रूण की सुरक्षा और गर्भावस्था में संभावित जटिलताओं का निदान
• इंफर्टिलिटी – निःसंतानता की चुनौतियाँ और नवीनतम उपचार
• यूरो-गायनी – आधुनिक सर्जरी और पुनर्निर्माण तकनीकें
• ऑब्स्टेट्रिक ड्रिल्स – आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक कदम
• प्रिवेन्टिव ऑन्कोलॉजी – कैंसर से बचाव के लिए रणनीतियाँ
• स्किल एन्हैंसिंग CME – नर्सों व स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
• एस्थेटिक गायनेकोलॉजी – महिला स्वास्थ्य और सौंदर्य में नए आयाम
डॉ. वीणा आचार्य मो 9829061176
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