भारत में हृदयाघात: “गोल्डन ऑवर” की अहमियत और समय पर इलाज की चुनौती
dr piyush joshi। cardiac surgeon। priyanka hospital

भारत में हृदयाघात: “गोल्डन ऑवर” की अहमियत और समय पर इलाज की चुनौती
प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर में STEMI मरीजों के लिए डोर टू बैलून समय अंतराष्ट्रीय मापधण्डों से भी कम है, जो की रोगियों को प्रदान की जाने वाली देखभाल की दक्षता और गुणवत्ता का एक प्रमुख संकेतक है।
डोर-टू-बैलून समय के कम होने का सीधा संदर्भ रिपरफ़्यूशन जल्दी होने से है, रिपेरफ्यूजन जितनी तेजी से होगा, हृदय की मांसपेशियों की क्षति को न्यूनतम करने और रोगी के परिणामों में सुधार की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।
दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 60–90 मिनट को “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है। यही वह समय है जब मरीज को थ्रोम्बोलाइसिस या प्राइमरी एंजियोप्लास्टी (PCI) जैसी आधुनिक चिकित्सा देकर दिल की मांसपेशियों को बचाया जा सकता है।
लेकिन भारत में केवल 25% मरीजों को ही समय पर थ्रोम्बोलाइटिक दवाएं मिल पाती हैं, और महज 5% को ही एंजियोप्लास्टी का लाभ मिल पाता है। अधिकतर मरीज 8–12 घंटे बाद अस्पताल पहुँचते हैं, जब दिल को स्थायी क्षति हो चुकी होती है। उसके बाद यदि हॉस्पिटल में इलाज में विलंब तो मरीज की जान जोखिम में होना स्वाभाविक है।
प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर ने यह सिद्ध किया है कि समय पर और कुशल इलाज से जीवन बचाना संभव है। अस्पताल में ऐसे कई केस सामने आए हैं जहां मरीजों का इलाज ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर कर उन्हें मौत के मुंह से निकाला गया।
पहला मामला 28 वर्षीय युवक का था जो क्रॉनिक स्मोकर था। वह 3:02 पर सीने में भारीपन और दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आया। तुरंत ECG से MI की पुष्टि हुई। 3:21 पर स्टंट डालकर उसकी जान बचाई गई।
दूसरे केस में 72 वर्षीय डायबिटिक मरीज को 1 घंटे से चेस्ट पेन हो रहा था। वह 12:05 पर पहुँचे और 12:29 तक उनका स्टंट डाल इलाज कर दिया गया।
तीसरा केस 34 वर्षीय युवक का था जिसे 40 मिनट से सीने में दर्द था। वह 12:40 पर भर्ती हुआ और 1:05 पर सफल एंजियोप्लास्टी की गई।
रैपिड एक्शन टीम की कमान संभालने वाले कप्तान डॉ पीयूष जोशी है। इस सफलता के पीछे अस्पताल की तत्परता, आधुनिक कैथ लैब, अनुभवी डॉक्टर और समय की पहचान है। डॉ. पीयूष जोशी, जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीएस शर्मा के सुपुत्र हैं और समर्पण के साथ हर मरीज का इलाज करते हैं।
“समय ही जीवन है” — हार्ट अटैक के लक्षणों को हल्के में न लें और तुरंत विशेषज्ञ अस्पताल में पहुँचें। यही समय आपके जीवन का सबसे बड़ा फैसला हो सकता है।
संपर्क सूत्र: डॉ पीयूष जोशी मो +919829025555



