गुलियन बैरी सिंड्रोम से बचाई 14 वर्षीय लड़की की जिंदगी
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गुलियन बैरी सिंड्रोम से बचाई 14 वर्षीय लड़की की जिंदगी
फोर्टिस हॉस्पिटल, जयपुर में सफल इलाज ; लकवे की स्थिति से मिली राहत
जयपुर। गुलियन बैरी सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तंत्रिका तंत्र की बीमारी है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा तंत्रिकाओं पर हमला करने के कारण होती है। यह स्थिति मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी, चलने-फिरने में परेशानी और गंभीर मामलों में पक्षाघात (लकवा) तक पहुंच सकती है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ और एडिशनल डायरेक्टर डॉ. शरद शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक 14 वर्षीय लड़की को इसी बीमारी के लक्षणों के साथ अस्पताल लाया गया था। शुरुआती जांच में ही गुलियन बैरी सिंड्रोम की पुष्टि हो गई। यदि समय पर इलाज न होता, तो यह लड़की स्थायी लकवे का शिकार हो सकती थी।
डॉ. शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने तुरंत आईवीआईजी (इम्युनोग्लोबुलिन) थेरेपी शुरू की, जो इस बीमारी की प्रगति को रोकने के लिए कारगर मानी जाती है। इसके साथ ही मांसपेशियों की शक्ति वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी की नियमित कक्षाएं शुरू की गईं। लगभग 40 दिनों के समर्पित इलाज के बाद, लड़की की स्थिति में सुधार आया और वह धीरे-धीरे चलने, खड़े होने और बोलने में सक्षम हो गई।
क्या है गुलियन बैरी सिंड्रोम ?
गुलियन बैरी सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला कर देती है। इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन की समस्या होती है। गंभीर मामलों में यह सांस लेने में दिक्कत या हृदय गति प्रभावित कर सकती है।
मुख्य कारण :
वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद रोग प्रतिरोधक प्रणाली की प्रतिक्रिया
फ्लू, डेंगू, जीका वायरस जैसी बीमारियों के बाद भी इसके मामले सामने आ सकते हैं
रेयर मामलों में टीकाकरण या सर्जरी के बाद
सावधानियां व बचाव :
किसी भी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद यदि शरीर में अचानक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
थकान, झुनझुनी, चलने में कठिनाई या मांसपेशियों में जकड़न को न करें नजरअंदाज
बीमारी की पुष्टि होते ही न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज शुरू कराना जरूरी है
उपचार :
आईवीआईजी थेरेपी और प्लाज्मा फेरसिस दो मुख्य उपचार हैं
फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन इलाज का अहम हिस्सा है
मरीज की हालत के अनुसार सांस लेने में मदद के लिए वेंटिलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है
डॉ. शर्मा ने बताया कि गुलियन बैरी सिंड्रोम जानलेवा हो सकता है, लेकिन समय पर पहचान और उचित इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
संपर्क:
डॉ. शरद शर्मा, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर
मोबाइल: 9314510426



