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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
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डॉ. एस. पी. सुद्रानिया : एक शोध जिसने बचाई लाखों जिंदगियां

डॉ. एस. पी. सुद्रानिया : एक शोध जिसने बचाई लाखों जिंदगियां

जयपुर | राजस्थान के पहले बाल रोग विशेषज्ञ सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एस. पी. सुद्रानिया ने वर्ष 1965-66 में अपने एम.डी. (पीडियाट्रिक्स) अध्ययन के दौरान एक ऐसा शोध किया, जिसने चिकित्सा जगत में इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने शोध में “दस्त (डायरिया) से पीड़ित शिशुओं और पाँच वर्ष तक के बच्चों में सीरम इलेक्ट्रोलाइट्स में होने वाले परिवर्तन” का अध्ययन किया।

यह अध्ययन एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर के बाल रोग वार्ड और मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला में 100 मरीजों पर किया गया। इस दौरान डॉ. सुद्रानिया ने एक विशेष इलेक्ट्रोलाइट फॉर्मूला तैयार किया, जिसे बाद में जैसलमेर में फैली हैजा महामारी के दौरान सफलतापूर्वक उपयोग किया गया।

उनके इस शोध को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 1970 में औपचारिक मान्यता दी। वर्ष 1978 में यही फॉर्मूला दुनिया भर में “ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS)” के नाम से जाना गया — जो आज दस्त और हैजा जैसी बीमारियों के इलाज की सबसे सरल, सस्ती और प्रभावी औषधि मानी जाती है।

इस खोज ने दुनिया भर में लाखों बच्चों की जान बचाई और बाल स्वास्थ्य नीति का आधार बनी। भारत सहित कई विकासशील देशों में ORS आज भी प्राथमिक चिकित्सा का सबसे अहम हिस्सा है।

लेकिन आज का चिकित्सा परिदृश्य चिंताजनक है। जिस खोज का उद्देश्य मानवता की सेवा था, उसे अब कुछ दवा कंपनियाँ लाभ का साधन बना रही हैं। ऐसे समय में यह ज़रूरी है कि चिकित्सा का असली उद्देश्य — सेवा, निष्ठा और संवेदना — फिर से केंद्र में आए।

डॉ. सुद्रानिया की विरासत हमें यह सिखाती है कि सच्ची चिकित्सा केवल इलाज नहीं, बल्कि जीवन बचाने का मिशन है।

आज भी डॉ. शिवरंजनी जैसे चिकित्सक इसी भावना के साथ इस मानवीय मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं।

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