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शॉक प्रबंधन : जल्दी पहचानें, जल्दी कार्रवाई करें, जान बचाएं। विषय पर एक सी एम् ई (CME) एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित

शॉक प्रबंधन : जल्दी पहचानें, जल्दी कार्रवाई करें, जान बचाएं। विषय पर एक सी एम् ई (CME) एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित 

नार्ची एवं राजस्थान हॉस्पिटल द्वारा सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम 

जयपुर, 2 जून 2026

नेशनल एसोसिएशन फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ ऑफ इंडिया नार्ची तथा राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर के तत्वावधान में मंगलवार को शॉक प्रबंधन: जल्दी पहचानें, जल्दी कार्रवाई करें, जान बचाएं। विषय पर एक सी एम् ई (CME) एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष , इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा चेयरमैन स्वास्थ्य कल्याण ग्रुप ने अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “शॉक एक ऐसी चिकित्सकीय आपात स्थिति है जिसमें प्रत्येक मिनट अत्यंत मूल्यवान होता है। यदि शॉक की पहचान प्रारम्भिक अवस्था में कर ली जाए और स्वास्थ्यकर्मी बिना विलम्ब उचित कदम उठाएँ, तो अनेक रोगियों का जीवन बचाया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि समय पर निर्णय लेना भी जीवनरक्षक सिद्ध होता है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी को शॉक प्रबंधन की अद्यतन जानकारी होनी चाहिए।

कार्यक्रम का शुभारम्भ इंडियन कॉलेज ऑफ मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (ICMCH) की चेयरपर्सन एवं नार्ची की वरिष्ठ शिक्षाविद् एव स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वीणा आचार्य के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि “शॉक की चुनौती किसी एक विशेषज्ञता तक सीमित नहीं है; यह प्रसूति, शल्य चिकित्सा, आंतरिक चिकित्सा, आपातकालीन चिकित्सा तथा क्रिटिकल केयर सभी क्षेत्रों से जुड़ी हुई है। सही समय पर सही हस्तक्षेप ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर निर्धारित करता है।” उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि जीवनरक्षक कौशलों को व्यवहारिक रूप से सुदृढ़ करना है।

इसके पश्चात् वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. तरु छाया ने “शॉक को समझना” विषय पर अत्यंत रोचक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शॉक के विभिन्न प्रकारों, प्रारम्भिक लक्षणों, रोगजनन तथा समय रहते निदान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “शॉक की शुरुआत रक्तचाप गिरने से पहले हो जाती है; अतः चिकित्सकों को सूक्ष्म नैदानिक संकेतों को पहचानना सीखना होगा।” उनके व्याख्यान ने उपस्थित चिकित्सकों को शॉक की प्रारम्भिक पहचान के महत्व को नए दृष्टिकोण से समझाया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चिकित्सक, वैज्ञानिक एवं आविष्कारक प्रोफेसर नोआम गैवरिएली (Prof. Noam Gavriely) रहे, जिन्होंने अमेरिका एवं इज़राइल में अपने दीर्घ चिकित्सा एवं अनुसंधान अनुभवों को साझा किया। उन्होंने अपने अभिनव आविष्कार “हेमाशॉक (HemaShock)” का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने बताया कि यह एक विशेष प्रकार का ऑटो-ट्रांसफ्यूजन टॉर्निकेट है, जो शरीर के निचले भागों में उपलब्ध रक्त को केंद्रीय परिसंचरण की ओर स्थानांतरित कर मस्तिष्क, हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह बनाए रखने में सहायता करता है। उन्होंने इसके वैज्ञानिक सिद्धांत, कार्यविधि, उपयोग की परिस्थितियाँ तथा आपातकालीन चिकित्सा में इसकी संभावित भूमिका का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उनका व्याख्यान उपस्थित चिकित्सकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा।

इसके उपरांत सुश्री अंजलि रंधेलिया द्वारा हेमाशॉक उपकरण का व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने उपकरण के उपयोग, तकनीकी पहलुओं तथा आपातकालीन परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विशेषज्ञों द्वारा संचालित हैंड्स-ऑन कार्यशाला एवं इंटरैक्टिव सत्र रहा। इस सत्र में विभिन्न विशेषज्ञताओं के वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया।

डॉ. राकेश भार्गव एव डॉ सलमा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, ने शॉक की स्थिति में वायुमार्ग प्रबंधन, ऑक्सीजन सपोर्ट एवं प्रारम्भिक पुनर्जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला।

डॉ. नितिका सोनी एव डॉ. सुची माथुर क्रिटिकल केयर विशेषज्ञो, ने आईसीयू में शॉक रोगियों की निगरानी, अंगों की कार्यक्षमता बनाए रखने तथा बहु-अंग विफलता की रोकथाम संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की।

डॉ. विक्रम बोहरा, वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन, ने बताया कि मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त प्रवाह बनाए रखना शॉक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है तथा न्यूरोलॉजिकल परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रारम्भिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

डॉ. उषा शेखावत, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, ने प्रसूति एवं स्त्री रोग संबंधी आपात स्थितियों विशेषकर प्रसवोत्तर रक्तस्राव में शॉक प्रबंधन की महत्ता पर प्रकाश डाला।

डॉ. कैलाश चन्द्र, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, ने कार्डियोजेनिक शॉक की चुनौतियों, शीघ्र निदान तथा समय पर हृदय संबंधी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

डॉ. शरद डागा, वरिष्ठ जनरल सर्जन, ने ट्रॉमा, आंतरिक रक्तस्राव एवं शल्य चिकित्सा आपात स्थितियों में शॉक प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं को विस्तार से समझाया।

पोस्टर लोकार्पण 

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने डॉ वीणा आचार्य द्वारा तेयार किया गए शॉक जागरूकता विषयक विशेष पोस्टर का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और जन-जागरूकता दोनों मिलकर ही आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

कार्यक्रम के में डॉ विजय सारस्वत के द्वारा प्रोफेसर नोआम गैवरिएली सहित सभी विशिष्ट अतिथियों एवं वक्ताओं का स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका ठाकुर ने किया।

अंत में आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा “जल्दी पहचानें, जल्दी कदम उठाएँ, जान बचाएँ का संदेश जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

डॉ दिनेश माथुर

9829061176

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