जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026: क्लर्क आमेर में सजी सुरों और शब्दों की महफिल

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026: क्लर्क आमेर में सजी सुरों और शब्दों की महफिल
साहित्यिक चर्चाओं के साथ राजस्थानी लोक कला और वैश्विक संगीत का संगम; देश-दुनिया के दिग्गज हुए शामिल
जयपुर। गुलाबी नगरी के प्रतिष्ठित होटल क्लर्क आमेर में कल रात ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026’ के अंतर्गत एक भव्य सांस्कृतिक और विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साहित्य, कला और संगीत के इस अनूठे समागम में दुनिया भर से आए लेखकों, विचारकों और कला प्रेमियों ने शिरकत की।

साहित्यिक सत्र और वैचारिक गहराई
शाम की शुरुआत गंभीर विमर्श से हुई, जिसमें समकालीन वैश्विक चुनौतियों और एआई (AI) के युग में साहित्य की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई। सत्र में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मशीनें भले ही शब्द बुन लें, लेकिन मानवीय संवेदनाएं और अनुभवों की गहराई केवल एक लेखक की कलम से ही संभव है। होटल के खुले प्रांगण में आयोजित इन सत्रों ने श्रोताओं को एक शांत और बौद्धिक वातावरण प्रदान किया।
लोक संगीत और फ्यूजन की जुगलबंदी
जैसे-जैसे शाम ढली, कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘म्यूजिक स्टेज’ बन गया। राजस्थान की माटी की खुशबू बिखेरते लंगा-मांगणियार कलाकारों ने जब अपनी खड़ताल और सारंगी की तान छेड़ी, तो विदेशी मेहमान भी झूमने पर मजबूर हो गए। इसके बाद वैश्विक फ्यूजन बैंड्स ने अपनी प्रस्तुतियों से आधुनिक और पारंपरिक संगीत का एक ऐसा सेतु बनाया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल की थाप और गिटार की धुनों के मेल ने पूरे परिसर को ऊर्जा से भर दिया।
कला और खानपान का उत्सव
होटल क्लर्क आमेर के लॉन को राजस्थानी हस्तशिल्प और आधुनिक कलाकृतियों से सजाया गया था। यहाँ न केवल किताबों पर चर्चा हुई, बल्कि स्थानीय कारीगरों के कौशल को भी प्रदर्शित किया गया।
क्लर्क आमेर में आयोजित यह फंक्शन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान का एक वैश्विक मंच साबित हुआ इसने सिद्ध कर दिया कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल केवल किताबों तक सीमित नहीं है।
जयपुर बुकमार्क 2026 : मराठी प्रकाशन और एआई के भविष्य पर मंथन
जयपुर, 17 जनवरी 2026 : ‘ब्लूवन इंक’ द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क (JBM) 2026 के तीसरे दिन क्षेत्रीय भाषाओं, विशेषकर मराठी प्रकाशन और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर केंद्रित सत्रों का आयोजन हुआ। डिग्गी पैलेस में आयोजित इस मंच पर दुनिया भर के प्रकाशकों, लेखकों और साहित्यिक एजेंटों ने विचारों का आदान-प्रदान किया।
मुख्य आकर्षण और चर्चा के बिंदु :
मराठी साहित्य का गौरव: मराठी को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा मिलने के उपलक्ष्य में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें हर्षा भटकल और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाषा की विरासत को संरक्षित करने और इसके भविष्य को डिजिटल युग में और अधिक प्रभावी बनाने के रोडमैप पर चर्चा की।
प्रकाशन जगत और AI : हार्परकॉलिन्स इंडिया के सीईओ अनंत पद्मनाभन और श्रेया पुंज ने एआई (AI) और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव पर बात की। उन्होंने ‘इयर ऑफ रीडिंग फॉर प्लेजर 2026’ पहल की घोषणा करते हुए कहा कि तकनीक के दौर में भी पढ़ने का आनंद कम नहीं हुआ है, बल्कि क्यूरेशन और मार्केटिंग के तरीके बदले हैं।
100 साल की विरासत : ‘पॉपुलर प्रकाशन’ के 100 वर्ष पूरे होने पर अनिश गवांडे और हर्षा भटकल ने स्वतंत्र भारत के इतिहास और प्रकाशन की भूमिका को याद किया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग : ‘लाइव लाइन्स’ सत्र में भारत और यूके के स्वतंत्र प्रकाशकों के बीच सहयोग (Publishing Fellowship) पर चर्चा हुई। वहीं, नॉर्वे के बाल साहित्य पर केंद्रित सत्र में बताया गया कि कैसे सरकारी सहयोग और अनुवाद के माध्यम से स्थानीय साहित्य वैश्विक बन सकता है।
मार्केटिंग और लेखकीय संबंध : दिन के अंतिम सत्रों में साहित्यिक एजेंटों की भूमिका और किताबों की डिजिटल मार्केटिंग में एआई के उपयोग पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।
कल (चौथे दिन) ‘द फ्रेंच कनेक्शन’, एनीमे आर्ट और जापानी साहित्य के साथ-साथ किताबों के भविष्य पर महत्वपूर्ण चर्चाएँ होंगी।

