नव वर्ष 2026 का संकल्प: डिजिटल बेड़ियाँ तोड़ें, अपनों से जुड़ें


नव वर्ष 2026 का संकल्प: डिजिटल बेड़ियाँ तोड़ें, अपनों से जुड़ें
जयपुर। जैसे-जैसे हम नए साल 2026 की दहलीज पर कदम रख रहे हैं, मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। प्रसिद्ध मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. दयाराम स्वामी ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत ‘आभासी सुख’ तो दे रही है, लेकिन वास्तविक जीवन को खोखला कर रही है। आज एक ही छत के नीचे रहते हुए भी लोग मीलों दूर हैं; हाथ में मोबाइल है और दिलों में दूरियां।
बिखरते रिश्ते और बढ़ते मानसिक रोग
डॉ. स्वामी के अनुसार, रील और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग परिवारों में तलाक की बढ़ती दर का एक मुख्य कारण बन रहा है। संवाद की कमी से आपसी स्नेह घट रहा है और लोग चिड़चिड़ेपन व डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। सबसे भयावह असर बच्चों पर पड़ रहा है, जिनमें हिंसक प्रवृत्ति, संस्कारों की कमी और गंभीर मानसिक विकार देखे जा रहे हैं। हम वास्तविक जीवन जीने के बजाय एक काल्पनिक और दिखावे की दुनिया में खुद को खत्म कर रहे हैं।
डॉ. दयाराम स्वामी के ‘स्वस्थ जीवन’ के सूत्र:
डिजिटल डिटॉक्स: सुबह उठते ही मोबाइल देखने के बजाय सूर्योदय को प्रणाम करें और प्रकृति से जुड़ें।
नो गैजेट ज़ोन: भोजन के समय और सोने से पहले मोबाइल को खुद से दूर रखें।
संवाद ही समाधान: परिवार के साथ बैठकर बातें करें। याद रखें, खुशी स्क्रीन के पीछे नहीं, बल्कि अपनों के स्पर्श और स्नेह में है।
सक्रिय जीवन: मोबाइल छोड़कर मैदान में उतरें, योग और भ्रमण को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
निष्कर्ष: 2026 में हमारा संकल्प ‘तकनीक का गुलाम’ बनने के बजाय ‘तकनीक का स्वामी’ बनने का होना चाहिए। यदि हम आज नहीं संभले, तो यह डिजिटल लत हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय कर देगी।
“खुशहाली का असली स्रोत स्क्रीन के पिक्सल में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए जीवंत पलों में है।”
संपर्क सूत्र डॉक्टर दयाराम स्वामी मो +919929208896



