
न्यू हॉप फॉर वेरीकोसील पेशेंट्स : युवा को मिला आधुनिक तकनीक से जीवन व करियर का नया मौका

जयपुर | 31 वर्षीय युवक, जो भारतीय सेना में चयन की तैयारी कर रहा था, अचानक वेरीकोसील की समस्या से जूझने लगा। नसों में जन्मजात कमजोरी और वेन्स के डैमेज होने से वह चिकित्सकीय रूप से अनफिट घोषित कर दिया गया। जिससे उसका करियर अधर में लटक गया।
आईकॉनिक्स हॉस्पिटल के प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अर्जुन सिंह शेखावत का कहना है कि वेरीकोसील एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडकोश की नसें सूज जाती हैं, जिससे दर्द, कमजोरी, शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी और कई मामलों में बांझपन तक की समस्या देखी जाती है।
उनके अनुसार अब इस बीमारी का आधुनिक और अत्यंत प्रभावी इलाज उपलब्ध है—Microscopic Sub-Inguinal Varicocelectomy, जिसे यूरोलॉजी की उन्नत तकनीकों में से एक माना जाता है। यह एक डे-केयर प्रोसीजर है, अर्थात मरीज को अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
उनका कहना है कि इस तकनीक में बेहद सूक्ष्म चीरा लगाया जाता है, जिससे न तो अधिक दर्द होता है और न ही बड़े निशान की समस्या रहती है। प्रक्रिया के 24–48 घंटे बाद मरीज सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकता है और कुछ ही दिनों में पूरी तरह सक्रिय हो जाता है।
डॉ अर्जुन सिंह यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि समय पर पहचान और सही तकनीक से उपचार कराने पर युवा अपनी शारीरिक क्षमता और फिटनेस को तेजी से वापस पा सकते हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि करियर जैसे महत्वपूर्ण अवसर भी पुनः हासिल किए जा सकते हैं।
इस आधुनिक माइक्रोस्कोपिक तकनीक ने वेरीकोसील मरीजों, खासकर युवा व सेना-प्रेमी उम्मीदवारों के लिए उम्मीद की नई रोशनी जगाई है।
संपर्क सूत्र डॉक्टर अर्जुन सिंह शेखावत
मो 094093 71607



