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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
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भाप से भी हो सकता है प्रोस्टेट का इलाज 

भाप से भी हो सकता है प्रोस्टेट का इलाज 

पेशाब का रास्ता खुल जाता है और मरीज को पेशाब करने में आसानी होने लगती है।

जयपुर। जयपुर के चिकित्सा क्षेत्र में प्रोस्टेट रोगियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी उपलब्धि सामने आई है। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंकित कायल ने आधुनिक रेजूम वाटर वेपर थेरेपी के माध्यम से ऐसे दो जटिल मरीजों का सफल उपचार किया, जिनके लिए पारंपरिक प्रोस्टेट ऑपरेशन कर पाना जोखिम भरा माना जा रहा था।

धन्वंतरी हॉस्पिटल में अपनी समस्या के समाधान के लिए आए दोनों मरीज लंबे समय से प्रोस्टेट बढ़ने की बीमारी से पीड़ित थे। पेशाब पूरी तरह रुक जाने के कारण उन्हें कैथेटर लगाकर रहना पड़ रहा था। इसके साथ ही मरीज पार्किंसन रोग, पहले की हृदय सर्जरी, दिल की धड़कन में गड़बड़ी, शरीर में लवणों का असंतुलन और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे थे। इन परिस्थितियों में बेहोशी देकर की जाने वाली पारंपरिक सर्जरी उनके जीवन के लिए खतरा बन सकती थी।

धन्वंतरी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर आर पी सैनी ने मरीजों को ढांढ़स बंधाते हुए कहा कि चिंता मत करो सब सही हो जाएगा।

कैसे काम करती है नई तकनीक – 

ऐसे कठिन हालात में डॉ. अंकित कायल ने रेजूम वाटर वेपर थेरेपी का प्रयोग किया। यह एक सरल और कम जोखिम वाली प्रक्रिया है, जिसमें किसी प्रकार की बड़ी सर्जरी नहीं की जाती।

इस तकनीक में एक छोटे उपकरण को पेशाब की नली के रास्ते प्रोस्टेट तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद प्रोस्टेट के बढ़े हुए हिस्से में नियंत्रित मात्रा में भाप डाली जाती है। यह भाप प्रोस्टेट के अतिरिक्त और बेकार हो चुके ऊतकों को नष्ट कर देती है। कुछ समय बाद शरीर स्वयं इन मृत ऊतकों को अवशोषित कर लेता है। इससे पेशाब का रास्ता खुल जाता है और मरीज को पेशाब करने में आसानी होने लगती है।

सिर्फ 10 मिनट में हुआ पूरा प्रोसीजर – 

डॉ. अंकित ने बताया कि यह पूरा प्रोसीजर सिर्फ 10 मिनट में पूरी कर ली गई। इसमें न तो बेहोशी की जरूरत पड़ी और न ही मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। ब्लीडिंग न के बराबर रही और इलाज के कुछ ही दिनों में मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट आए। सबसे अहम बात यह रही कि इस उपचार से मरीज की यौन क्षमता पर भी कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। निजी चिकित्सा संस्थान में इस तकनीक से किया गया यह पहला सफल उपचार है।

सम्पर्क सूत्र डॉ आर पी सैनी मो 9829055760

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