नार्ची कॉन 2025 – जयपुर में वर्ल्ड कांग्रेस ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए दिए ऐतिहासिक संदेश

नार्ची कॉन 2025 – जयपुर में वर्ल्ड कांग्रेस ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए दिए ऐतिहासिक संदेश
जयपुर दिनाक , 20 सितम्बर 2025।
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में 16वीं वर्ल्ड कांग्रेस एवं 24वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ऑफ नर्ची (NARCHICON 2025) का शुभारंभ एक गरिमामय समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर देश–विदेश से आए विशिष्ट अतिथि एवं प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने उद्घाटन समारोह को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम का आरंभ गणेश वंदना एवं मां सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके पश्चात् डॉ. मधुलिका अग्रवाल और डॉ. सोनल गौड़ के साथ सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। इस दीप प्रज्वलन ने ज्ञान और विवेक की ज्योति का प्रतीकात्मक संदेश दिया।
आयोजन की सूत्रधार डॉ. नीलम जैन ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया । आयोजक अध्यक्ष डॉ. वीणा आचार्य ने अपने स्वागत भाषण में सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों को स्पष्ट किया।
डॉ. सुब्रता डॉन ने नर्ची की ऐतिहासिक उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि यह वर्ष संस्था का स्वर्ण जयंती वर्ष और संस्थापक डॉ. सी.एस. डॉन की शताब्दी वर्षगांठ के रूप में भी ऐतिहासिक महत्व रखता है।
नर्ची की अध्यक्ष डॉ. मंजु पुरी ने संगठन की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिक कार्यक्रम की जानकारी डॉ. उषा शेखावत एवं डॉ. दीपा मसन्द ने दी, जिसमें मुख्य सत्रों और शैक्षणिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया।
• विशिष्ट अतिथि डॉ. वीरेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) वी.एम. काटोच, पूर्व महानिदेशक–आईसीएमआर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार की राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से महत्ता बताई।
सम्मेलन की स्मारिका (Souvenir), न्यूज़लेटर का विमोचन तथा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। नर्ची के अंतर्गत नए प्रजनन चिकित्सा केन्द्रों की घोषणा भी की गई।
डॉ दीपा मसंद ने बताया कि पैनल चर्चाओं में कठिन सीज़ेरियन ऑपरेशन और ओवुलेशन इंडक्शन जैसे विषयों पर ज़ोर दिया गया। तथा विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि “हर मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार प्रोटोकॉल और सर्जिकल तैयारी ही सुरक्षित मातृत्व की कुंजी है।”
डॉ. मंजु पुरी ने “प्रेगनेंसी में तीव्र पेट दर्द” पर कहा – “मिनटों की देरी जीवन और मृत्यु का फ़ासला तय कर सकती है, इसलिए बहु-विषयक टीमवर्क ही समाधान है।”
डॉ उषा शेखावत ने किशोरावस्था और यूरो-गायने स्वास्थ्य के बारे में बताया
डॉ. प्रतीक तांबे ने चेताया – “पीसीओडी को हल्के में न लें, इसके लाल संकेत किशोरियों में भविष्य की गंभीर बीमारियों का संकेत हैं।”
वहीं डॉ. सारगम सोनी ने कहा – “किशोरावस्था में मोटापा छिपा हुआ विस्फोट है, जो आगे मधुमेह और बांझपन की समस्या को जन्म देता है।”
यूरो-गायने सेशन्स में बताया गया कि “ओवरएक्टिव ब्लैडर और यूरोडायनेमिक स्टडीज़ जैसी तकनीकें महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता सुधारने का नया अध्याय हैं।”
डॉ मधुलिका अगरवाल ने कहा कि की-नोट एड्रेस – के पेपर ने इस सेमिनार में नए आयाम बनाये है जिसमे
डॉ. शिव गौतम ने कहा – “महिला स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य के बिना अधूरा है, किशोरावस्था से मेनोपॉज़ तक मन की देखभाल उतनी ही ज़रूरी है जितनी शरीर की।”
डॉ. क्लॉडिया मज़्ज़ारेला (इटली) ने जोड़ा – “स्त्री की सौंदर्य और कार्यात्मक समस्याओं को अनदेखा करना अन्याय है, आधुनिक चिकित्सा को इन खाइयों को भरना होगा।”
डॉ. नुज़हत अज़ीज़ ने गूँजते शब्दों में कहा – “हर स्थिर भ्रूण मृत्यु (Stillbirth) हमें झकझोरती है, इसके लिए केवल गाइडलाइन नहीं, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य तंत्र को बदलना होगा।”
डॉ वीणा आचार्य ने सी.एस. डॉन ओरेशन के सत्र कीअध्यक्षता की।
डॉ. प्रिया गणेशकुमार ने कहा भारत को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर मुक्त बनाना अब सपना नहीं, HPV वैक्सीन और स्क्रीनिंग इसे वास्तविकता बना सकती है।”
• डॉ. जे. रवीचन्द्रन (मलेशिया) – “चिकित्सक भी मरीज की त्रासदी के दूसरे शिकार (Second Victim) होते हैं, हमें डॉक्टरों को भी मानसिक सहारा देना होगा।”
• डॉ. माला श्रीवास्तव (पी.डी. बावेजा ओरेशन) – “अंडाशय पर हर ऑपरेशन एक युद्ध है—जहाँ लक्ष्य प्रजनन क्षमता की शांति को बचाना होना चाहिए।”
• डॉ. अचला बत्रा (एस.एन. मुखर्जी ओरेशन) – “एनीमिया केवल आयरन की कमी नहीं है, यह स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता का मौन संकेत है।”
डॉ तरु छाया ने मेनोपॉज़ और नई तकनीकें के सत्र के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि “हर अस्पताल में मेनोपॉज़ क्लिनिक होना चाहिए, क्योंकि यह जीवन के तीसरे चरण की ढाल है।”
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी पर डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह खेड़ा ने कहा – “मिनिमली इनवेसिव तकनीकें प्रसूति-स्त्रीरोग की दुनिया को नया भविष्य दे रही हैं।”
डॉ धनञ्जय मंगल ने बाल स्वास्थ्य और नवजात चिकित्सा के बारे में बताते हुए कहा कि – “गोल्डन ऑवर में सही कदम नवजात के पूरे जीवन को सुरक्षित बना सकते हैं।”
डॉ. जीव शंकर – “एंटीबायोटिक का गलत उपयोग हर नवजात को खतरे में डालता है, हमें विवेकपूर्ण दवा नीति अपनानी होगी।”
डॉ. अमिताभा सेन गुप्ता – “ऑक्टोपस मदर केयर जैसी नवीन विधियाँ NICU में मस्तिष्क सुरक्षा का नया युग ला सकती हैं।”
यह सम्मेलन केवल ज्ञान का मंच नहीं बल्कि माँ और बच्चे के सुरक्षित भविष्य की सामूहिक प्रतिज्ञा बनकर उभरा।
इस सेमिनार ने संदेश दिया कि रोकथाम इलाज से भी बड़ा हथियार है, हर उम्र और परिस्थिति के लिए व्यक्तिगत उपचार आवश्यक है, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और भविष्य केवल तकनीक से नहीं बल्कि बहु-विषयक सहयोग से सुरक्षित होगा।
प्रस्तुति – डॉ दिनेश माथुर मो 9829061176



