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राजस्थान हॉस्पिटल में डॉक्टर फ़ोरम की बैठक

राजस्थान हॉस्पिटल में डॉक्टर फ़ोरम की बैठक

त्वचा केवल सौंदर्य नहीं, आंतरिक स्वास्थ्य का दर्पण है” — डॉ दिनेश माथुर

जयपुर, 11 सितम्बर 2025।

राजस्थान हॉस्पिटल में आयोजित डॉक्टर्स साइंटिफिक सोशल एवं कल्चरल फ़ोरम की बैठक में त्वचा रोग विज्ञान (Dermatology) को सभी चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण विषय माना गया। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि त्वचा केवल शरीर का बाहरी आवरण नहीं है, बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य का सटीक दर्पण है।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. एस.एस. अग्रवाल (चेयरमैन, राजस्थान हॉस्पिटल एवं डॉक्टर फ़ोरम), डॉ. वीरेन्द्र सिंह (प्रेसिडेंट, राजस्थान हॉस्पिटल), सचिव डॉ. अशोक गोयल एवं 92 वर्षीय वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. परमानन्द भार्गव ने की।

कार्यक्रम का स्वागत वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों को त्वचा पर दिखने वाले शुरुआती संकेतों को समझना चाहिए, क्योंकि कई बार बीमारी का पहला सुराग त्वचा ही देती है।

आधुनिक चिकित्सा में सेवा भावी दृष्टिकोण की आवश्यकता 

डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने राजस्थान हॉस्पिटल के चिकित्सकों में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ सेवा भाव और मानवीय संस्कार विकसित करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने डॉक्टर्स फ़ोरम की गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नियमित होने चाहिए ताकि चिकित्सकों में आधुनिक ज्ञान के साथ आपसी सौहार्द और सामंजस्य भी बढ़े।

मुख्य व्याख्यान : डर्मेटोलॉजी फॉर नॉन-डर्मेटोलॉजिस्ट्स

मुख्य वक्ता डॉ. दिनेश माथुर (वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं HOD, डर्मेटोलॉजी विभाग) ने अपने व्याख्यान में बताया कि —

डायबिटीज़ में गर्दन व बगल में काली मखमली त्वचा (Acanthosis Nigricans)

थायरॉइड रोगों में चेहरे पर काले धब्बे (Melasma) व ड्राई स्किन

लिवर रोगों में लाल हथेलियां और स्पाइडर एंजियोमा

बाल रोगों में खसरा, चिकनपॉक्स, हैंड-फुट-माउथ डिज़ीज़ के रैशेज

इमरजेंसी मेडिसिन में Stevens-Johnson Syndrome, Meningococcemia जैसे जानलेवा संकेत

रूमेटोलॉजी में Lupus, Scleroderma, Dermatomyositis

संक्रामक रोगों में Secondary Syphilis, Viral Fever, Endocarditis

कैंसर में अचानक उभरने वाले धब्बे या Acanthosis Nigricans

उन्होंने विशेष रूप से रेड फ्लैग संकेतों की पहचान पर जोर दिया जैसे — पूरे शरीर पर लालिमा (Erythroderma), छालेदार रैश, Stevens-Johnson Syndrome, अचानक होठों का फूलना (Angioedema/Anaphylaxis) आदि।

डॉ. माथुर ने चेतावनी दी कि बार-बार स्टेरॉयड लगाने से केवल लक्षण दबते हैं, लेकिन गंभीर रोग छूट सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई बार Paget’s Disease of Breast को साधारण एक्ज़िमा समझ लिया जाता है, जबकि वह कैंसर का संकेत होता है।

सर्वसम्मति : त्वचा विज्ञान हर चिकित्सक के लिए अनिवार्य होना चाहिए

बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि —

त्वचा केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान का अभिन्न हिस्सा है।

प्रत्येक चिकित्सक को त्वचा रोगों का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए ताकि रोगों का समय रहते निदान और उपचार संभव हो सके।

सम्मान और क्विज़ प्रतियोगिता भी आयोजित

अंत में डॉ. एस.एस. अग्रवाल एवं डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने वरिष्ठ चिकित्सकों —

डॉ. परमानन्द भार्गव, डॉ. बी.के. जैन, डॉ. रवीन्द्र टोंगिया, डॉ. सागर, डॉ. राज प्रभा पानगरिया, डॉ. अलका राव, डॉ. महेश पौद्दार, डॉ. अशोक गोयल, डॉ. रोहित पंड्या, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. प्राण भाम्बानी एवं डॉ. राजीव तिवारी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का आकर्षण डॉ. दिनेश माथुर द्वारा आयोजित रोचक क्विज़ रहा, जिसमें विजेताओं को डॉ. माथुर एवं डॉ. वीणा आचार्य ने पुरस्कार प्रदान किए।

संदेश : राजस्थान हॉस्पिटल में हुई इस बैठक ने स्पष्ट किया कि हर चिकित्सक को त्वचा रोग विज्ञान की मूलभूत समझ आवश्यक है, ताकि समय रहते गंभीर रोगों की पहचान कर मरीजों की जान बचाई जा सके।

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