मानसिक रोगों में देखभाल करने वालों की बढ़ती चुनौती: सिज़ोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर में अंतर स्पष्ट

मानसिक रोगों में देखभाल करने वालों की बढ़ती चुनौती: सिज़ोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर में अंतर स्पष्ट
जयपुर | एसएमएस मेडिकल कॉलेज का शोध इंटरनेशनल जर्नल IJPCR में प्रकाशित

एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. चकित शर्मा द्वारा किए गए शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल IJPCR में प्रकाशित किया गया है। प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक त्यागी के मार्गदर्शन में किए गए इस शोध में सिज़ोफ्रेनिया और बाइपोलर अफेक्टिव डिसऑर्डर (BPAD) के मरीजों की देखभाल करने वालों पर पड़ने वाले मानसिक, सामाजिक और शारीरिक प्रभावों की तुलना की गई है।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष
यह अध्ययन बताता है कि दोनों रोगों में देखभाल करने वालों पर बोझ तो भारी होता है, लेकिन उसका स्वरूप भिन्न होता है। बाइपोलर मरीजों के तीव्र और अनियंत्रित मूड बदलाव के कारण उनके परिजनों को अधिक शारीरिक तनाव होता है, जबकि सिज़ोफ्रेनिया के दीर्घकालिक और गहन लक्षणों से जुड़ा मानसिक दबाव अधिक होता है।
सिज़ोफ्रेनिया में लक्षणों की तीव्रता सीधे देखभाल करने वाले के तनाव से जुड़ी पाई गई, जबकि बाइपोलर मामलों में सामाजिक और पारिवारिक पहलुओं ने अधिक असर डाला।
निजीकृत समर्थन योजनाओं की आवश्यकता
अध्ययन यह सुझाव देता है कि देखभाल करने वालों के लिए रोग-विशिष्ट समर्थन योजनाएं बनाई जानी चाहिए। सिज़ोफ्रेनिया के मामलों में लंबे समय तक स्थिर देखभाल आवश्यक है, जबकि बाइपोलर रोगियों के लिए त्वरित हस्तक्षेप और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कारगर हैं।
राजस्थान के लिए गर्व का विषय
राजस्थान के चिकित्सक का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होना न केवल गौरव की बात है, बल्कि यह राज्य की बौद्धिक प्रतिभा और चिकित्सा अनुसंधान में प्रगति को भी दर्शाता है। यह अध्ययन मानसिक स्वास्थ्य नीतियों को परिवार-केंद्रित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संपर्क सूत्र : डॉ चकित शर्मा मो +91 96641 26731


