विशेष
चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांस
dental / दंत

कम हड्डियों वाले मरीजों के लिए वरदान बनी ‘कोर्टिकल डेंटल इंप्लांट’ तकनीक

कम हड्डियों वाले मरीजों के लिए वरदान बनी ‘कोर्टिकल डेंटल इंप्लांट’ तकनीक

दौसा के दंत रोग विशेषज्ञ इम्प्लांट स्पेशलिस्ट डॉ विश्वास शर्मा ने बताया कि कम हड्डियों वाले मरीजों के लिए वरदान है ‘कोर्टिकल डेंटल इंप्लांट’ तकनीक।

उन्होंने कहा कि कमजोर या कम हड्डी वाले मरीजों के लिए एडवांस्ड डेंटिस्ट्री की अत्याधुनिक कोर्टिकल डेंटल इंप्लांट (बेसल इंप्लांट) तकनीक से लोगो के स्वास्थ्य में अप्रत्याशित फायदा होता है ।

अक्सर जबड़े की हड्डी कम होने पर मरीज पारंपरिक इंप्लांट नहीं करवा पाते, लेकिन यह नई तकनीक ऐसे मरीजों के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर उभरी है।

पारंपरिक बनाम कोर्टिकल इंप्लांट : मुख्य अंतर

हड्डी का चयन : पारंपरिक इंप्लांट जबड़े की ऊपरी स्पंजी हड्डी (Cancellous Bone) में लगाए जाते हैं, जो समय के साथ गल सकती है। वहीं, कोर्टिकल इंप्लांट्स को जबड़े की गहरी और अत्यधिक कठोर कोर्टिकल या बेसल हड्डी (Cortical/Basal Bone) में स्थिर (एंकर) किया जाता है।

मजबूती और स्थिरता : बेसल हड्डी इंसान के पूरे जीवनभर सुरक्षित रहती है और कभी नहीं गलती। इस वजह से इंप्लांट को तुरंत बेहद मजबूत पकड़ (Immediate Anchorage) मिलती है।

समय की बचत : मरीज को हड्डियों के जुड़ने का महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता और बहुत कम समय में नए दांत लगा दिए जाते हैं।

किन मरीजों के लिए है    सबसे फायदेमंद ?

यह तकनीक उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा असरदार है जो उम्रदराज हैं, जिनकी जबड़े की हड्डी घिस चुकी है, या फिर जिन्होंने बोन ग्राफ्टिंग (Bone Grafting) जैसी जटिल सर्जरी से बचने का विकल्प चुनना है।

डॉ शर्मा के अनुसार, बेसल इंप्लांट तकनीक ने डेंटल ट्रीटमेंट को न केवल त्वरित और सुरक्षित बनाया है, बल्कि बिना बोन ग्राफ्टिंग के भी मरीजों को एक सुंदर और स्थाई मुस्कान देना संभव कर दिया है।

सम्पर्क सूत्र डॉ विश्वास शर्मा        9057645959

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button