डेंटल शिक्षा और सेवाओं में प्रगति की शुरुआत : राजस्थान का गौरव बढ़़ा

डेंटल शिक्षा और सेवाओं में प्रगति की शुरुआत : राजस्थान का गौरव बढ़़ा
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय डेंटल आयोग अधिनियम, 2023 की धारा 11 के तहत ‘डेंटल एडवाइजरी काउंसिल’ का गठन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक दूरगामी कदम है। यह परिषद देश में दंत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नीतिगत समन्वय के लिए एक मुख्य स्तंभ के रूप में कार्य करेगी।
1. डेंटल एडवाइजरी काउंसिल का गठन और डॉ. होती लाल गुप्ता का चयन

इस परिषद की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि राजस्थान के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. होती लाल गुप्ता (प्राचार्य, राजस्थान डेंटल कॉलेज एवं अध्यक्ष, राजस्थान डेंटल काउंसिल) का सदस्य के रूप में चयन है। डॉ. गुप्ता परिषद में राजस्थान राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। अपने दशकों के अनुभव और कुशल नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. गुप्ता ने डेंटल शिक्षा को आधुनिक बनाने और पेशेवर नैतिकता को सुदृढ़ करने में अमूल्य योगदान दिया है। यह परिषद एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करेगी जहाँ राज्य अपनी चिंताओं को आयोग के समक्ष रख सकेंगे और देशभर में एक समान परीक्षा प्रणाली व उच्च शिक्षण मानकों को लागू करने में मदद करेंगे।
2. डेंटल क्लीनिक खोलने के नियम और नियामक सीमाएं
भारत में डेंटल क्लीनिक खोलने का अधिकार केवल उन चिकित्सकों के पास है जिनके पास डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) द्वारा मान्यता प्राप्त BDS या MDS की डिग्री है और वे संबंधित स्टेट डेंटल काउंसिल में पंजीकृत हैं। क्लीनिक संचालन हेतु निम्नलिखित सीमाओं का पालन अनिवार्य है:
पंजीकरण : क्लीनिक को ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के तहत स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के पास पंजीकृत होना चाहिए।
मानक : बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और एक्स-रे मशीनों के लिए AERB के सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
नैतिकता : डॉक्टर केवल अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में ही उपचार कर सकते हैं और भ्रामक विज्ञापन देना प्रतिबंधित है।
3. डॉ. होती लाल गुप्ता : प्रयोगात्मक शिक्षा के प्रेरणास्रोत
डॉ. होती लाल गुप्ता का विद्यार्थियों के प्रति समर्पण उनके शिक्षण कौशल में झलकता है। कॉलेज में उन्होंने किताबी ज्ञान के बजाय प्रायोगिक शिक्षा (Practical Education) पर विशेष बल दिया है। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी न केवल दंत चिकित्सा की बारीकियां सीख रहे हैं, बल्कि जटिल क्लिनिकल मामलों का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं। विद्यार्थियों के बीच उनकी छवि एक ऐसे मार्गदर्शक की है जो कार्य सीखने के वास्तविक अवसर प्रदान करते हैं। उनकी इसी निष्ठा के कारण भावी दंत चिकित्सक उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और उनके अनुभव को अपने करियर की नींव मानते हैं।



