
घुटनों की समय रहते देखभाल से बच सकते हैं ऑपरेशन से – डॉ. मनीष वैष्णव
शेल्बी हॉस्पिटल के वरिष्ठ ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. मनीष वैष्णव का कहना है कि अगर व्यक्ति समय रहते घुटनों की देखभाल और उपचार शुरू कर दे, तो बाद में होने वाली गंभीर क्षति और घुटना प्रत्यारोपण जैसी बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है।
कैसे करें घुटनों की देखभाल और रिपेयर?
आज के समय में, घुटनों के दर्द की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। 40 की उम्र के बाद यह समस्या बढ़ने लगती है। लेकिन सही दिनचर्या और उपचार से इसे रोका जा सकता है।
✅ प्राकृतिक घुटने की सेहत बनाए रखने के उपाय:
1. वजन नियंत्रण: अधिक वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज जल्दी घिस सकता है।
2. नियमित व्यायाम: तैराकी, साइक्लिंग, स्ट्रेचिंग और वॉकिंग जैसे कम प्रभाव वाले व्यायाम घुटनों को मजबूत रखते हैं।
3. संतुलित आहार: विटामिन D, कैल्शियम, ओमेगा-3 और प्रोटीन युक्त आहार हड्डियों और जोड़ो के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
4. गलत मुद्रा से बचें: ज़मीन पर पालथी मारकर बैठना, घंटों खड़े रहना या एक ही मुद्रा में बैठे रहना घुटनों पर दबाव बढ़ाता है।
5. आरंभिक इलाज: घुटनों में हल्का दर्द या अकड़न महसूस होने पर ही ऑर्थोपेडिक चिकित्सक से मिलें।
⚙️ घुटनों की ‘रिपेयर’ क्या है?
‘रिपेयर’ से तात्पर्य है –
घुटनों में मौजूद क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को दवाओं, फिजियोथेरेपी या इंजेक्शन के माध्यम से सुधारना।
समय रहते जीवनशैली में बदलाव लाकर जोड़ों के घिसाव को रोकना।
PRP थैरेपी, हायालुरोनिक एसिड इंजेक्शन, या अरली स्टेज आर्थोस्कोपी जैसी प्रक्रियाएं भी उपयोगी हो सकती हैं।
डॉ. वैष्णव बताते हैं कि जब व्यक्ति समय पर चिकित्सा सलाह लेता है, तो ये गैर-सर्जिकल उपाय कई मामलों में घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।
कृत्रिम घुटना प्रत्यारोपण तब होता है ज़रूरी, जब…
जब घुटनों की हालत इतनी खराब हो जाए कि उपरोक्त उपायों से भी आराम न मिले और व्यक्ति का रोज़मर्रा का जीवन प्रभावित होने लगे – जैसे कि चलना, उठना-बैठना या सोना – तब घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प होता है।
संपर्क सूत्र डॉ. मनीष वैष्णव
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन
शेल्बी हॉस्पिटल
📱 मो.: 90017 40688



