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cancer / कैंसर

एक सर्जन की पुकार – इस ‘धीमी मौत’ को अब और मत नजरअंदाज़ कीजिए

🗞️ विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2025

🚭 “मैं ट्यूमर हटा सकता हूं, पर तंबाकू नहीं!”

एक सर्जन की पुकार – इस ‘धीमी मौत’ को अब और मत नजरअंदाज़ कीजिए

अक्सर हर दिन मेरी ऑपरेशन टेबल पर कोई न कोई ज़िंदगी तंबाकू की कीमत चुका रही होती है।

कभी जबड़े का कैंसर, कभी गले की नली में ट्यूमर… और अक्सर – ‘काश समय रहते छोड़ दिया होता!’ की एक बेबस पुकार।

पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

एक डॉक्टर की यह अपील, महज एक पेशेवर की नहीं—बल्कि एक ऐसे इंसान की पुकार है जो रोज़ाना तंबाकू से बर्बाद होते सपने, चेहरे और परिवारों को देखता है।

🔬 तंबाकू : ज़हर जो धीमे-धीमे मारता है

🌍 GLOBOCAN 2022 के मुताबिक, हर साल 26 लाख से अधिक मौतें तंबाकू से संबंधित कैंसर के कारण होती हैं।

🚬 फेफड़े, गला, मुंह और स्वरयंत्र का कैंसर—सबसे आम और सबसे क्रूर परिणाम।

📊 भारत की तस्वीर : GATS-2 (2016-17) रिपोर्ट से झलक

28.6% वयस्क अब भी किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं

19% पुरुष और 2% महिलाएं करते हैं धूम्रपान

धूम्ररहित तंबाकू (जैसे खैनी, गुटखा) का उपयोग और भी चिंताजनक

18.9 वर्ष की उम्र में तंबाकू सेवन की औसत शुरुआत!

यह आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं—यह भविष्य की बीमारियों का खाका हैं।

🚸 किशोरों पर मंडराता खतरा : सस्ती सिगरेट, खुले विज्ञापन, और बुझती चेतना

“सिर्फ एक बार ट्राय कर रहा हूं”—यहीं से शुरू होती है वो लत जो पूरी ज़िंदगी को निगल जाती है।

हर नुक्कड़ पर बिकती बीड़ी-सिगरेट, चमकते पाउच और प्रभावी रोकथाम के अभाव में हम अपने बच्चों का कल खतरे में डाल रहे हैं।

❤️‍🩹 तंबाकू : सिर्फ कैंसर नहीं, यह रोगों की फौज लेकर आता है

हृदयाघात और स्ट्रोक

फेफड़ों की पुरानी बीमारी (COPD)

गर्भावस्था में जटिलताएं और नवजात मृत्यु

बांझपन और ऑपरेशन के बाद खराब रिकवरी

👨‍⚕️ डॉक्टर की भूमिका : मरीज से लेकर समाज तक

“डॉक्टर ने मना किया है”—इस वाक्य में आज भी सबसे ज़्यादा वजन होता है।

हर डॉक्टर को चाहिए कि वे:

हर मरीज़ से तंबाकू सेवन के बारे में पूछें

प्रभावी परामर्श दें

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी की जानकारी व सुविधा उपलब्ध कराएं

मरीज को बताएं—छोड़ने के बाद भी कुछ नुकसान लंबे समय तक असर करते हैं

🙏 एक सर्जन की अंतिम अपील

> “मैं ट्यूमर निकाल सकता हूं, पर तंबाकू को रोकना समाज के हाथ में है।

कैंसर के बाद कुछ भी पूरी तरह ठीक नहीं होता – बचाव ही सबसे बड़ी दवा है।”

📞 डॉ. जितेन्द्र कुमार शर्मा

कंसल्टेंट, हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी

शाल्बी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

📱 संपर्क: 7877938660

📢 इस 31 मई को एक संकल्प लें — एक कश नहीं, एक कदम ज़िंदगी की ओर।

तंबाकू के खिलाफ युद्ध अब हर घर से शुरू होना चाहिए।

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