हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) : 2026 में असाध्य रोगों के विरुद्ध एक नई उम्मीद : डॉ रमेश अग्रवाल


हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) : 2026 में असाध्य रोगों के विरुद्ध एक नई उम्मीद : डॉ रमेश अग्रवाल
हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) एक ऐसी उन्नत चिकित्सा पद्धति है जिसमें रोगी को एक विशेष चैंबर के अंदर सामान्य वायुमंडलीय दबाव से अधिक दबाव पर 100% शुद्ध ऑक्सीजन दी जाती है। 2026 के नए वर्ष में, यह तकनीक उन असाध्य रोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जिनका उपचार पारंपरिक दवाओं से कठिन था।
यह तकनीक कैसे काम करती है?
सामान्य परिस्थितियों में ऑक्सीजन केवल हीमोग्लोबिन के माध्यम से शरीर में पहुँचती है, लेकिन HBOT के उच्च दबाव के कारण ऑक्सीजन सीधे शरीर के तरल पदार्थों (जैसे रक्त प्लाज्मा और सेरेब्रल स्पाइनल फ्लूइड) में घुल जाती है। इससे शरीर के उन हिस्सों तक भी भरपूर ऑक्सीजन पहुँचती है जहाँ रक्त का संचार कम हो गया है।
असाध्य रोगों में सहायक:
डायबिटिक फुट अल्सर: यह तकनीक घावों को तेजी से भरने और गैंग्रीन के खतरे को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।
न्यूरोलॉजिकल विकार: स्ट्रोक, ऑटिज्म और दर्दनाक मस्तिष्क की चोटों (TBI) के उपचार में यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में मदद करती है।
पुराना दर्द और सूजन: फाइब्रोमायल्जिया जैसे रोगों में यह ऊतकों की सूजन कम कर प्राकृतिक रिकवरी शुरू करती है।
कैंसर सपोर्टिव केयर: रेडिएशन थेरेपी के बाद क्षतिग्रस्त हुए स्वस्थ ऊतकों को ठीक करने में यह सहायक है।
2026 में बदलाव की लहर
2026 तक, पोर्टेबल HBOT चैंबर्स और एआई-आधारित व्यक्तिगत प्रेशर सेटिंग्स के आने से यह तकनीक अधिक सुलभ और सटीक हो गई है। यह न केवल लक्षणों का इलाज करती है, बल्कि स्टेम सेल्स को सक्रिय कर शरीर की आंतरिक मरम्मत प्रणाली को जगाती है। नए वर्ष में, चिकित्सा जगत का लक्ष्य ‘मैनेजमेंट’ से हटकर ‘रिकवरी’ की ओर बढ़ना है, जिससे लाखों लोगों को असाध्य रोगों के दर्द से मुक्ति मिल सकेगी।
संपर्क सूत्र डॉक्टर रमेश अग्रवाल 9829017133

