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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
dermatology / चर्मरोग

एटोपिक डर्मेटाइटिस सिर्फ त्वचा का रोग नहीं, पूरे शरीर की ‘इम्यूनिटी’ से जुड़ी समस्या : विशेषज्ञ

एटोपिक डर्मेटाइटिस सिर्फ त्वचा का रोग नहीं, पूरे शरीर की ‘इम्यूनिटी’ से जुड़ी समस्या

जयपुर। बार-बार होने वाली खुजली और सूखी त्वचा केवल बाहरी समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) में गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। जयपुर डर्मेटोलॉजी ग्रुप द्वारा ‘अटोपिक डर्मेटाइटिस (आम एक्जीमा) एवं उसके आधुनिकतम उपचार’ पर आयोजित एक सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से उभर कर आई। कार्यक्रम में शहर के 50 से अधिक वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

त्वचा : शरीर का सक्रिय प्रतिरक्षा अंग

कार्यक्रम के संयोजक एवं जयपुर डर्मेटोलॉजी ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. दिनेश माथुर ने बताया कि त्वचा केवल शरीर का आवरण नहीं, बल्कि एक सक्रिय ‘इम्यून ऑर्गन’ है। यह कीटाणुओं और प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ शरीर की रक्षा प्रणाली में मुख्य भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में उपचार का उद्देश्य केवल खुजली दबाना नहीं, बल्कि त्वचा की मरम्मत और ‘इम्यून बैलेंस’ बनाना है।

बीमारी का दुष्चक्र और साइटोकाइन्स का प्रभाव

वैज्ञानिक सत्र में डॉ. रविन्द्र धाभाई ने समझाया कि जब त्वचा की सुरक्षा परत (Skin Barrier) कमजोर होती है, तो बाहरी तत्व शरीर में प्रवेश कर सूजन और तेज खुजली पैदा करते हैं। वहीं, डॉ. संजय कनोडिया ने बताया कि आधुनिक शोधों के अनुसार, शरीर में ‘साइटोकाइन्स’ नामक रसायनों के अधिक बनने से नसों में उत्तेजना और खुजली बढ़ती है। उन्होंने सही मॉइस्चराइज़ेशन को इलाज की नींव बताया।

मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत उपचार (Personalized Care)

डॉ. सुनील घोहटे ने कहा कि एक्जीमा का असर मरीज की नींद, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। अब ‘एक ही इलाज सबके लिए’ का तरीका बदल गया है और मरीज की जरूरत के हिसाब से सटीक उपचार उपलब्ध है। डॉ. एस. आर. शुक्ला, डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल बी. एस. राठौर एवं डॉ. दीपक माथुर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में वैज्ञानिक तरीके से सही समय पर पहचान को अनिवार्य बताया।

पैनल डिस्कशन : भविष्य की जटिलताओं पर चर्चा

डॉ. दिनेश माथुर के संयोजन में हुए पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए :

अस्थमा का खतरा : डॉ. सुरेन्द्र थालोर ने बताया कि एक्जीमा के मरीजों में आगे चलकर अस्थमा और एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों की देखभाल : डॉ. नीतू सिडाना ने बच्चों में बढ़ते एक्जीमा पर चिंता जताते हुए समय पर विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता बताई।

जागरूकता और सही उपयोग : डॉ. राम सिंह मीना ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और डॉ. अमित मल्होत्रा ने क्रीम के सही मात्रा में इस्तेमाल पर जोर दिया।

आधुनिक दवाएं : डॉ. अमित तिवारी ने बताया कि अब गंभीर रोगियों के लिए भी ‘टारगेटेड’ दवाएं उपलब्ध हैं।

नियमितता की जरूरत : डॉ. आर. पी. डोरियां और डॉ. शिवी निझावन ने कहा कि इलाज अधूरा छोड़ने से बीमारी लौट सकती है; नियमित मॉइस्चराइज़र और जीवनशैली में सुधार से स्वस्थ जीवन संभव है।

विशेषज्ञों का संदेश : क्या करें और क्या न करें?

सूखी त्वचा और खुजली को कभी हल्के में न लें।

बच्चों में लगातार एक्जीमा होने पर विशेषज्ञ से ही परामर्श लें।

दवाइयां हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें, मनमर्जी से इलाज बंद न करें।

अच्छी गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइज़र का नियमित उपयोग करें।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. माथुर ने सभी वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर धन्यवाद ज्ञापित किया।

संपर्क:

डॉ. दिनेश माथुर

09829061176

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