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सोरायसिस सिर्फ त्वचा रोग नहीं, एक ‘बहु-प्रणालीगत’ चुनौती है: राजस्थान अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम

सोरायसिस सिर्फ त्वचा रोग नहीं, एक ‘बहु-प्रणालीगत’ चुनौती है: राजस्थान अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम

जयपुर: 28 अक्टूबर 2025 – विश्व सोरायसिस दिवस (World Psoriasis Day) की पूर्व संध्या पर, जयपुर के राजस्थान अस्पताल में सोरायसिस के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सोरायसिस के विभिन्न पहलुओं, इसके प्रभाव और प्रबंधन पर प्रकाश डाला।

🌍 सोरायसिस दिवस का इतिहास और महत्व

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने सोरायसिस दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि:

“हर वर्ष 29 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2004 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ सोरायसिस एसोसिएशन (IFPA) द्वारा हुई थी, जिसे बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य देशों ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया। आज यह दिन 70 से भी अधिक देशों में सोरायसिस रोगियों के लिए जागरूकता और समर्थन जुटाने के लिए मनाया जा रहा है।”

🔬 सोरायसिस: आंकड़े और तथ्य

कार्यक्रम के आयोजक और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश माथुर ने रोग के वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य पर आंकड़े प्रस्तुत किए:

दुनिया भर में लगभग 1.25 करोड़ लोग सोरायसिस से प्रभावित हैं।

भारत में वयस्कों में 36 लाख से ज़्यादा लोग इस क्रोनिक बीमारी से जूझ रहे हैं।

सोरायसिस एक दीर्घकालिक (क्रोनिक), प्रतिरक्षा-मध्यस्थ (इम्यून मीडिएटेड इन्फ्लामेंटरी) त्वचा रोग है। इसमें त्वचा कोशिकाएँ (केराटिनोसाइट्स) असामान्य रूप से तेज़ी से (सामान्यतः 3–4 हफ्ते की जगह कुछ दिनों में) बनती हैं और एक के ऊपर एक जमा होती रहती हैं।

लक्षण :

घुटनों, कोहनी, छाती, पीठ और सिर की जड़ों पर चकत्ते (Plaques) और स्केलिंग, खुजली, जलन, दर्द, नाखूनों में बदलाव (पिटिंग) और कभी-कभी जोड़ों में सूजन (सोरायटिक आर्थराइटिस) हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात: डॉ. माथुर ने जोर देकर कहा कि यह रोग संक्रामक नहीं है।

⚠️ ट्रिगर्स और जटिलताएँ

अस्पताल के सी.ई.ओ. डॉ. विजय सारस्वत ने तनाव, व्यायाम की कमी, धूम्रपान, अत्यधिक शराब, मोटापा और स्किन ट्रॉमा को सोरायसिस के प्रमुख ट्रिगर्स बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मौसम में बदलाव से भी इस रोग की स्थिति में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

वाईस प्रेसिडेंट डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने सोरायसिस से जुड़ी जटिलताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा:

“यह रोग केवल त्वचा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ हृदय रोग और जोड़ों में दर्द जैसी अनेक प्रणालीगत जटिलताएँ भी हो सकती हैं।”

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविन्द शर्मा ने सोरायसिस रोगियों में हृदय-विकृति, उच्च रक्तचाप, और धमनियों की बीमारी पाए जाने की पुष्टि की।

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल उपाध्याय के अनुसार, लगभग 30% सोरायसिस रोगियों में जोड़ों में दर्द का प्रभाव (सोरायटिक आर्थराइटिस) हो सकता है।

जनरल फिजिशियन डॉ. डी.के. जैन ने उपचार में मोटापे, विशेषकर पेट के मोटापे को कम करने के लाभ बताए।

🧠 मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली प्रबंधन

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. राघव शाह ने सोरायसिस के साथ जुड़े मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अवसाद, चिंता और सामाजिक बहिष्कार आज भी बहुत आम हैं। उन्होंने धूम्रपान और शराब से बचने की सलाह दी, क्योंकि ये रोग को सक्रिय कर सकते हैं। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद गुप्ता ने तनाव नियंत्रण (योग, ध्यान, पर्याप्त नींद) और उचित त्वचा की देखभाल (मॉइश्चराइजिंग, ट्रिगर से बचाव) को आवश्यक बताया।

🧬 कारण और उपचार के नए विकल्प

डॉ. मधुर जोशी ने बताया कि सोरायसिस के होने के कारण जेनेटिक और परिवार में पाए जाते हैं, जिसमें विभिन्न जीनों की भूमिका बताई गई है।

डॉ. नूतन कटेवा ने रोग में प्रतिरक्षा-तंत्र की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें टी-सेल्स असामान्य तरीके से सक्रिय होकर त्वचा की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते हैं।

डॉ. दिनेश माथुर ने उपचार विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार पूर्ण उपचार संभव नहीं होता है, लेकिन लक्षण-नियंत्रण, जटिलताओं की रोकथाम और जीवन-गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अनेक विकल्प मौजूद हैं:

सामयिक उपचार (Topical Treatment) :

स्टेरॉइड क्रीम, विटामिन D प्रतिरूप क्रीम, टॉपिकल साइटोस्टैटिक्स, स्कैल्प के लिए शैम्पू-आधारित उपचार आदि।

प्रकाश उपचार (Phototherapy) :

त्वचा को नियंत्रित तरीके से अल्ट्रावायलेट (UV) प्रकाश जैसे UVB, PUVA, और नैरो बैंड के संपर्क में लाना।

प्रणालीगत उपचार (Systemic Treatment) :

गंभीर स्थितियों में या जोड़ों पर प्रभाव होने पर टैबलेट्स (मेथोट्रेक्सेट, साइक्लोस्पोरिन, एसिट्रेटिन) तथा अत्याधुनिक बायोलॉजिक दवाएँ (एंटी-TNF, IL-17, IL-23 इनहिबिटर) बहुत प्रभावशाली होती हैं।

✅ निष्कर्ष और आह्वान

राजस्थान अस्पताल के प्रेसिडेंट डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा:

सोरायसिस एक बहु-प्रणालीगत, प्रतिरक्षा-मध्यस्थ, दीर्घकालिक त्वचा-रोग है। इसे समय रहते समझना, ट्रिगर्स से बचना, उपयुक्त उपचार प्राप्त करना और जीवनशैली में समायोजन करना अत्यंत आवश्यक है। ‘विश्व सोरायसिस दिवस’ का उद्देश्य है — इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रोगियों को सामाजिक–मनोवैज्ञानिक समर्थन देना तथा स्वास्थ्य-सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।”

कार्यक्रम के अंत में, डॉ. एस.एस. अग्रवाल और अन्य चिकित्सकों द्वारा जागरूकता बढ़ाने हेतु एक पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

संपर्क सूत्र डॉक्टर दिनेश माथुर 98290 61176

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