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बारिश के दिनों में गैस्ट्रोएन्टराइटिस से बचें और जानिए बचने के तरीके और इलाज

गैस्ट्रोएनटेटाइटिस  : भोजन की बुरी आदतों तथा घटिया स्तर के पानी को पीने से गर्मी तथा विशेषकर बरसात के दिनों में लोग इस बीमारी के शिकार बन जाते हैं।

गैस्ट्रो एंट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर एस चक्रवर्ती कहते हैं कि

गैस्ट्रोएनटेटाइरटिस विशेष रूप से पेट, तथा आंतों में सूजन की वजह से होता है। वैसे तो किसी भी उम्र के लोगों को यह समस्या झेलनी पड़ सकती है, लेकिन बच्चों, बूढ़ों तथा खराब व्यवस्था के साथ रहने वालों पर इस बीमारी का आक्रमण आसानी से होता है। यह एक संक्रामक रोग है जो कि अस्वास्थ्यकर स्थिति तथा दूषित खान-पान की वजह से होता है। अनुसार आम तौर पर इस बीमारी की पहचान एक साथ दस्त, बुखार और उल्टी का होना है।

लेकिन इस समस्या से कुछ साधारण सावधानियां बरतकर बचा जा सकता है। जैसे खाना बनाने और खाने से पहले तथा बाथरूम से आने के बाद साबुन से हाथ साफ कर लें।

इस्तेमाल से पहले फलों तथा सब्जियों को घो लेना चाहिए।

भोजन का रेफ्रिजरेशन पर्याप्त सावधानी बरतते हुए किया जाना चाहिए।

खाना ठीक तरह से कटे हुए नाखूनों के साथ छुआ जाना चाहिए ताकि किटाणुओं को जमा होने से रोका जा सके और रोग को दूर रखा जा सके।

इस बीमारी का विशेष रूप से 50 वर्ष के लोगों पर एक नियमित अंतराल के बाद होने वाले लगातार चपेट में आने का एक बहुत सामान्य अफैक्ट पाइल्स भी है, जिससे बहुत से लोग बिना किसी को बताये चुपचाप सहन करते रहते हैं और भविष्य में अपनी बीमारी को बढ़ा लेते है।

अपच एसिडिटी इंसान के दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करने के साथ अनेक रोगों को निमंत्रण देता है इसलिए समय रहते चिकित्सकीय परामर्श से इसका इलाज कर लेना ही सही होता है

गैस्ट्रोएनटेराइटिस का प्रत्मिक घरेलू इलाज

हाइड्रेशन : शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, या इलेक्ट्रोलाइट समाधान पिएं।

आराम : पेट को आराम देने के लिए भोजन के बीच में कुछ समय का अंतराल रखें और पर्याप्त नींद लें।

हल्का भोजन : जब खाने की इच्छा हो तो हल्का और सुपाच्य भोजन खाएं, जैसे कि केले, चावल, सेब की चटनी, टोस्ट (BRAT डाइट)।

अदरक : अदरक की चाय या अदरक के टुकड़ों को चबाने से मतली और उल्टी में राहत मिल सकती है।

पुदीना : पुदीने की चाय पेट की सूजन और दर्द में राहत प्रदान कर सकती है।

दही : दही या प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ पाचन में सुधार कर सकते हैं और अच्छे बैक्टीरिया को पुनर्स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।

तुलसी : तुलसी की पत्तियों का सेवन करने से पेट की गड़बड़ी और सूजन में राहत मिल सकती है।

ध्यान और योग : तनाव को कम करने और पाचन को सुधारने के लिए ध्यान और हल्के योग का अभ्यास करें।

यदि लक्षण गंभीर हों, जैसे कि उच्च बुखार, लगातार उल्टी, खून की उल्टी या मल, या अत्यधिक निर्जलीकरण, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

सम्पर्क सूत्र-

डॉ. एस. चक्रवती मो. 9828088321

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