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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांस
संपादकीय

क्या सभी वर्गों के लिए होनी चाहिए मुफ्त की सुविधा

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क्या सभी वर्गों के लिए होनी चाहिए मुफ्त की सुविधा
एक तरफ सरकार ने राजस्व की प्राप्ति के लिए स्लैब बनाए हुए हैं और उसी अनुसार उनसे टैक्स वसूला जाता है तो फिर चुनावी फायदे के लिए सभी वर्ग के लिए मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन क्यों !
जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर बंदरबांट क्यों
आमद अठन्नी खर्चा रुपैया
कमाई के साधन सीमित और खर्च ज्यादा हो जाएंगे तो सरकार को भी कर्ज लेना पड़ जाएगा

राजकीय सत्ता में जो भी पार्टी हो , चुनावी रण में जनता के बीच जाने से पहले उसे जीत का रास्ता लोकलुभावन जनहित की घोषणाओं में ही नजर आता है। चाहे वह पूरी हो सके या नहीं , बाद में देखा जाएगा। एक बार सत्ता तो झोली में आए।

मुफ्त, रियायतों की योजनाओं का ढोल पीट रही पार्टियां इसका ज्वलंत उदाहरण है।
सरकार द्वारा चुनावी फायदे वाली स्कीमों को चलाने के लिए कर्मचारियों अधिकारियों और ठेकेदारों का भुगतान रोका जा रहा है।
क्या सभी श्रेणियां को मुफ्त में सुविधा चाहिए ?
क्या उच्च वर्ग जो लाखों करोड़ों रुपए का टैक्स देता है उसको भी निशुल्क चिकित्सा शिक्षा बिजली पानी आदि चाहिए ? विषय सोचने का है कि वोट के लिए लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं। चिकित्सक वर्ग कहता है कि धनाढ्य वर्ग का व्यक्ति जो पैसा खर्च कर इलाज लेता था आज वह भी कहने लग गया है कि चिरंजीवी योजना के तहत इलाज करो मुफ्त इलाज करो। क्या यह है सरकार पर अतिरिक्त बोझ नहीं होगा ? विषय सोचने योग्य है
क्या इसके दुष्परिणाम भविष्य में जनता को नहीं भुगतने पड़ेंगे?

यह बात सही है कि गरीब और अभावग्रस्त लोगों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का प्रबंध करना सरकार का दायित्व है।
लेकिन, वोट के लिए सभी को मुफ्त की योजनाओं का लाभ देने लगें तो इसे बंदरबांट ही कहा जाएगा।
मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन
मुफ्तखोरी और जनकल्याण की योजनाओं में बारीक अंतर है। जनकल्याण की योजनाओं का दीर्घकालिक और सकारात्मक प्रभाव होता है। लोगों के जीवनस्तर में सुधार के साथ संसाधनों का विकास होता है।
चुनावी रण में तात्कालिक फायदे के लिए सक्षम लोगों के लिए भी की जाने वाली घोषणाएं ‘मुफ्तखोरी’ ही कहलाती है।
इस वजह से वित्तीय संकट होना स्वाभाविक है।
सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है। कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल मुफ्त की योजनाओं के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
आरबीआई की रिपोर्ट भी बताती है कि राज्य सरकारें मुफ्त योजनाओं पर अंधाधुंध खर्च कर कर्ज के जाल में फंस रही हैं।
पार्टी कोई भी हो सरकार कोई भी हो उसे निर्धन कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए योजनाएं जरूर बननी चाहिए ताकि जन कल्याण हो।
और धनाढ्य वर्ग के लिए प्रीमियम पर अत्याधुनिक सुविधा प्रदान करनी चाहिए न कि सभी के लिए मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन।

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