बदलती जीवनशैली और काम का दबाव: महिलाओं में बढ़ता मोटापा दे रहा है मानसिक तनाव को आमंत्रण

बदलती जीवनशैली और काम का दबाव: महिलाओं में बढ़ता मोटापा दे रहा है मानसिक तनाव को आमंत्रण
जयपुर।
आज के आधुनिक युग में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। कामकाजी महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, लेकिन इसके साथ ही उनकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव आया है।

हाल ही में जयपुर के ‘जॉयफुल हेवन काउंसलिंग सेंटर’ के त्रिवर्षीय समारोह में विशेषज्ञों द्वारा इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि बदलती लाइफस्टाइल के कारण महिलाएं तेजी से मोटापे का शिकार हो रही हैं, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है।
सिटिंग जॉब और बाहर का खाना मुख्य कारण
आधुनिक दौर में अधिकतर कामकाजी महिलाओं का कार्यस्थल पर घंटों बैठे रहने (Sedentary Job) का काम होता है। शारीरिक सक्रियता की कमी और समय के अभाव में घर के खाने के बजाय बाहर के फास्ट फूड या अनहेल्दी डाइट पर निर्भरता बढ़ने के कारण महिलाओं में मोटापा (ओबेसिटी) तेजी से बढ़ रहा है।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दोहरा प्रहार
यह बढ़ता वजन न केवल थायराइड, पीसीओडी (PCOD) और डायबिटीज जैसी शारीरिक समस्याएं पैदा कर रहा है, बल्कि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मोटापे के कारण कई महिलाएं बॉडी शेमिंग, कम आत्मविश्वास और डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं। सामाजिक रूढ़िवादिता के कारण कई बार अधिक वजन वाली युवतियों को वैवाहिक रिश्तों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका मानसिक तनाव और बढ़ जाता है।
दोहरी जिम्मेदारी के बीच खुद का ख्याल जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को घर और दफ्तर दोनों की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है। इसलिए उन्हें अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी।
संतुलित आहार : बाहर के खाने और जंक फूड से परहेज करें। डाइट में हरी सब्जियां और फाइबर शामिल करें।
शारीरिक सक्रियता : ऑफिस में हर एक घंटे में छोटा ब्रेक लें और वॉक करें। योग या हल्के व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
मानसिक स्वास्थ्य : तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (Meditation) लगाएं और जरूरत पड़ने पर काउंसलर की मदद लें।
महिलाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना पूरे परिवार और समाज की उन्नति के लिए बेहद आवश्यक है।
जयपुर। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे Jooyfull Heaven Counselling Centre ने अपनी सफल यात्रा के तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस अवसर पर संस्था द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें समाज में मानसिक स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं युवाओं के भावनात्मक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
संस्था की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रुचिका बडेसरा ने कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। एक सफल क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट होने के साथ-साथ उन्होंने एक प्रेरणादायक व्यवसायी महिला के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की है।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन, नीट एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन एवं प्रेरणात्मक सहयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रखा गया। साथ ही संस्था द्वारा शीघ्र प्रारंभ किए जाने वाले “मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता” अभियान की घोषणा भी की गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं एवं किशोरियों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना है।
समारोह में मुख्य अतिथि फादर जॉर्जिश ब्रिटो, ललित शर्मा, भीम सिंह कसानिया, श्रेया तथा शिवकरण चौधरी सहित संस्था की पूरी टीम, प्रशिक्षु काउंसलर्स एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने एवं अधिक से अधिक लोगों तक काउंसलिंग सेवाएँ पहुँचाने के संकल्प के साथ किया गया।



