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चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांसमेंट्स। जयपुर में होता है असाध्य और कठिन रोगों का आधुनिकतम और नव सृजित तकनीकों से इलाज ।
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भारतीय चाय को दुनिया की पहली ‘वेलनेस चॉइस’ बनाना हमारा लक्ष्य : श्री सी. मुरुगन (IAS)

विशेष साक्षात्कार : भारतीय चाय को दुनिया की पहली ‘वेलनेस चॉइस’ बनाना हमारा लक्ष्य : श्री सी. मुरुगन (IAS)

जयपुर में सफल ‘इंडिया टी वॉकाथॉन’ के बाद, टी बोर्ड इंडिया के उपाध्यक्ष श्री सी. मुरुगन (IAS) ने चाय संस्कृति, युवाओं की भागीदारी और भविष्य की राह पर बेबाक चर्चा की।

एक नई शुरुआत जयपुर से 

प्रश्न : जयपुर वॉकाथॉन में 500 से अधिक प्रतिभागियों को देखकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

उत्तर : जयपुर का उत्साह हमारी उम्मीदों से कहीं अधिक था। सुबह 7:30 बजे इतने लोगों को एक साथ देखना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत थी। राजस्थान के लोगों ने चाय को केवल एक पेय के रूप में नहीं, बल्कि जीवन जीने के तरीके के रूप में अपनाया है—यह हमारे लिए बेहद प्रेरणादायक है।

मिशन और विजन : भारतीय चाय की वैश्विक पहचान

प्रश्न : टी बोर्ड इंडिया का मुख्य मिशन क्या है?

उत्तर : हमारा काम सिर्फ उत्पादन को नियंत्रित करना नहीं है। हम भारतीय चाय के लिए एक वैश्विक पहचान बना रहे हैं—इसकी गुणवत्ता, विविधता और विरासत को दुनिया तक पहुँचाना। साथ ही, छोटे उत्पादक से लेकर आम उपभोक्ता तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना ही हमारा मूल उद्देश्य है।

प्रश्न : इस वर्ष की थीम ‘इंडिया टी: द वेलनेस दैट विंस’ के पीछे क्या सोच थी?

उत्तर : पूरी दुनिया आज ‘वेलनेस’ (स्वस्थ जीवनशैली) की ओर लौट रही है। भारतीय चाय में हमेशा से एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक गुण रहे हैं। हम बस दुनिया को याद दिला रहे हैं कि जिस वेलनेस को वे खोज रहे हैं, वह हर रोज हमारे घरों में ही तैयार हो रही है।

छोटे उत्पादकों के लिए सुरक्षा कवच

“आज छोटे चाय उत्पादक भारत के कुल उत्पादन में 52% से अधिक का योगदान देते हैं। उनके लिए वित्तीय सहायता, गुणवत्ता उन्नयन और उचित मूल्य तंत्र हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

युवाओं से जुड़ाव ही चाय का आधुनिक अवतार

प्रश्न : आज के युवा कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स की ओर झुक रहे हैं। टी बोर्ड इसे कैसे देख रहा है?

उत्तर : हम प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जुड़ाव चाहते हैं। हमें युवाओं की भाषा—फिटनेस, फोकस और सस्टेनेबिलिटी—में बात करनी होगी। वॉकाथॉन इसी सोच का हिस्सा है। आने वाले समय में आप टी बोर्ड को कैंपस एक्टिवेशन, डिजिटल कैंपेन और ऐसे इवेंट्स में देखेंगे जो चाय को आधुनिक लाइफस्टाइल से जोड़ते हैं।

प्रश्न : चाय उद्योग में युवाओं के लिए क्या करियर अवसर हैं?

उत्तर : बहुत सारे! एग्री-टेक, क्वालिटी टेस्टिंग, टी टेस्टिंग (Sommelier), एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, डिजिटल मार्केटिंग, टी टूरिज्म और पैकेजिंग इनोवेशन। यह ₹35,000+ करोड़ का उद्योग है और यहाँ हर कौशल के लिए जगह है।

क्षेत्रीय विविधता और डिजिटल रणनीति

क्षेत्रीय गौरव : दार्जिलिंग की कोमलता, असम की कड़कपन और नीलगिरी की चमक को हम GI टैगिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मिशनों के जरिए दुनिया को बता रहे हैं।

डिजिटल मौजूदगी : हम कंटेंट क्रिएटर्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स के साथ मिलकर इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर चाय की कहानी को नए अंदाज में पेश कर रहे हैं।

भविष्य की राह यह है : 5 साल का लक्ष्य है

प्रश्न : अगले पांच वर्षों में आप टी बोर्ड को कहां देखना चाहते हैं?

उत्तर : हम चाहते हैं कि भारतीय चाय दुनिया की पहली पसंद की वेलनेस ड्रिंक बने। उत्पादन में हम दूसरे नंबर पर हैं—लेकिन गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक ‘स्टोरीटेलिंग’ में नंबर वन बनना हमारा लक्ष्य है।

संदेश

जब भी आप चाय की एक चुस्की लेते हैं, तो आप लाखों भारतीय किसानों, सदियों पुरानी परंपरा और एक उज्ज्वल भविष्य से जुड़ते हैं। चाय सिर्फ एक पेय नहीं—यह हमारी पहचान है। इसे गर्व के साथ अपनाएं।”

Quick Highlights

जयपुर वॉकाथॉन : 500+ प्रतिभागी।

प्रमुख प्राथमिकता : 52% योगदान देने वाले छोटे चाय उत्पादक।

आगामी योजनाएं : भारत के 10+ प्रमुख शहरों में वॉकाथॉन का आयोजन।

सोशल मीडिया अभियान : #IndiaTea के जरिए चाय की कहानियों को साझा करना।

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