किडनी रोगों में होम्योपैथी : सहायक उपचार के रूप में उभरती नई उम्मीद : डॉ राहुल शर्मा

किडनी रोगों में होम्योपैथी : सहायक उपचार के रूप में उभरती नई उम्मीद
किडनी की बीमारियाँ (CKD) आज एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन गई हैं। इस बारे में जयपुर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर राहुल शर्मा का कहना है कि जहाँ पारंपरिक चिकित्सा (Allopathy) में डायलिसिस और ट्रांसप्लांट मुख्य विकल्प माने जाते हैं, वहीं होम्योपैथी एक सहायक और पूरक उपचार (Complementary Therapy) के रूप में लोकप्रियता हासिल कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, होम्योपैथी किडनी की कार्यक्षमता को सहारा देने और रोगी के जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) सुधारने में प्रभावी हो सकती है।
कैसे काम करती है होम्योपैथी ?
होम्योपैथी में उपचार ‘लक्षणों की समानता’ और ‘व्यक्तिगत विश्लेषण’ पर आधारित होता है। यह केवल बीमारी का इलाज नहीं करती, बल्कि शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करती है। शोध बताते हैं कि शुरुआती चरणों (Stage 1-3) में सही होम्योपैथिक दवाओं से सीरम क्रिएटिनिन (Creatinine) और यूरिया (Urea) के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
प्रमुख दवाएं और उनके लाभ :
होम्योपैथी में कई ऐसी दवाएं हैं जिनका उपयोग किडनी की विभिन्न समस्याओं के लिए किया जाता है:
Lycopodium और Apis Mellifica : शरीर में सूजन (Edema) और पेशाब की कमी को दूर करने में सहायक।
Arsenicum Album : कमजोरी और किडनी की शिथिलता के लक्षणों में प्रभावी।
Serum Anguillae : क्रिएटिनिन के स्तर को संतुलित करने के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।
डॉ शर्मा का मानना है कि होम्योपैथी को डायलिसिस के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पूरक उपचार के रूप में देखा जाना चाहिए। मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दवा न लें और अपनी नियमित एलोपैथिक दवाओं को अचानक बंद न करें।
संपर्क सूत्र डॉक्टर राहुल शर्मा 97823 43327



