अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा पर विचारोत्तेजक सेमिनार: सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने की पहल

अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा पर विचारोत्तेजक सेमिनार: सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने की पहल

जयपुर, [तारीख] – अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और संरक्षा जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, फायर एंड सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAI) द्वारा एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। ‘IFSY (इंडिया फायर एंड सिक्योरिटी यात्रा)’ के नाम से आयोजित यह कार्यक्रम शनिवार, 29 नवम्बर 2025 को दोपहर 2:00 बजे से कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान, जयपुर में शुरू होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
FSAI जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष श्री अंकुर गुप्ता और IFSY 2025 के संयोजक श्री अमित कक्कड़ ने बताया कि हाल ही में एसएमएस अस्पताल जैसी प्रमुख संस्थाओं में हुई आग की घटनाओं ने इस विषय पर गहन चिंतन की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। यह सेमिनार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी महत्वपूर्ण हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, ताकि अग्नि सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की जा सके।
सेमिनार में जिन अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:
इलेक्ट्रिकल फॉल्ट को रोकना।
कोड्स एवं स्टैंडर्ड्स का अनुपालन।
सुरक्षा के संबंध में क्या करें और क्या न करें।
आपातकाल में स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार और उनकी निर्णायक भूमिका।
प्रमुख हितधारकों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अस्पताल मालिक, चीफ इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी, अस्पतालों के आर्किटेक्ट, एमईपी कंसल्टेंट, सिस्टम इंटीग्रेटर, उत्पाद निर्माता और FSAI के सभी सदस्य प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
मुख्य वक्ता और प्रेरणा
कार्यक्रम का शुभारंभ एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक महेश्वरी के विशेष संदेश से होगा। इसके बाद, गुप्त वृंदावन धाम के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु श्याम सुंदर दास द्वारा एक प्रेरणादायी लाइफ स्किल सेशन भी आयोजित किया जाएगा, जो संकट की घड़ी में मनोबल और सूझबूझ बनाए रखने पर केंद्रित होगा।
इस अवसर पर, FSAI के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वी. श्रीनिवास (हैदराबाद) और राष्ट्रीय सचिव श्री दिपेन मेहता (अहमदाबाद) की विशेष उपस्थिति कार्यक्रम के महत्व को और अधिक बढ़ाएगी।
FSAI का यह कदम अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने और अग्नि सुरक्षा की व्यापक जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।



