
वेरीकोज वेंस का 1 दिन में इलाज संभव।
वेरीकोज वेंस का सरल इलाज अब नई तकनीक से
वेरीकोज वेन्स पर विशेषज्ञ रिपोर्ट

जयपुर। शैल बी हॉस्पिटल के प्रसिद्ध इंटरवेशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राकेश कुमार कुमावत (एमबीबीएस, डीएनबी रेडियोडाग्नोसिस, एफवीआईआर, एफआईपीएम) बताते हैं कि वेरीकोज वेन्स (Varicose Veins) एक सामान्य लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या है।
इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
भारत में यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में होती है, हालांकि महिलाओं में इसकी संभावना अधिक रहती है।
कारण और जोखिम कारक :
गर्भावस्था के बाद महिलाओं में यह रोग अधिक देखा जाता है क्योंकि गर्भ के दौरान बढ़ते हुए भ्रूण (Fetus) का वजन शिराओं पर दबाव डालता है, जिससे वाल्व कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं—जैसे शिक्षक, ट्रैफिक पुलिस, सैन्यकर्मी, फैक्ट्री वर्कर—उनमें भी यह रोग होने की संभावना अधिक रहती है। पारिवारिक या जेनेटिक कारण भी इसकी बड़ी वजह हैं।
लक्षण और निदान :
शिराओं का त्वचा पर उभरा हुआ, नीला-हरा दिखना, पैरों में भारीपन, दर्द, जलन या सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। कभी-कभी त्वचा का रंग बदलना और घाव (Ulcer) बनना भी गंभीर अवस्था की निशानी है। निदान के लिए कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड सबसे सटीक जांच है, जिससे शिराओं की स्थिति और रक्त प्रवाह की रुकावट स्पष्ट हो जाती है।
उपचार और सावधानियां :
डॉ. कुमावत बताते हैं कि आधुनिक तकनीकों से इसका इलाज संभव है। लेजर थेरेपी, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) और फोम स्क्लेरोथैरेपी आजकल के सुरक्षित और प्रभावी उपचार हैं, जिनमें मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। शुरुआती अवस्था में मरीज कंप्रेशन स्टॉकिंग्स, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना और लंबे समय तक खड़े रहने से बचाव जैसी सावधानियों से लाभ उठा सकते हैं।
विशेष संदेश :
वेरीकोज वेन्स भले ही जानलेवा रोग न हो, लेकिन इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर निदान और आधुनिक उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
संपर्क सूत्र : डॉ राकेश कुमार कुमावत
(vascucare diagnostics & interventions )
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