गुर्दे की बीमारी के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानिए किस डॉक्टर के पास जाना है सही?

गुर्दे की बीमारी के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानिए किस डॉक्टर के पास जाना है सही?
जयपुर।

आज भी बड़ी संख्या में लोग यह नहीं जानते कि गुर्दे से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए किस विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। इस कारण इलाज में देरी होती है, जो गंभीर परिणाम दे सकती है। इस विषय में डॉ. गौरव शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी विभाग, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जानकारी दी।
गुर्दे की बीमारी के लक्षण क्या हैं?
डॉ. शर्मा के अनुसार, निम्न लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी की ओर संकेत करते हैं:-
बार-बार पेशाब आना या पेशाब का रुक-रुक कर आना
चेहरे और पैरों में सूजन
शरीर में खून की कमी (एनीमिया)
उच्च रक्तचाप
पेशाब में खून या झाग (प्रोटीन) आना
भूख में कमी और कमजोरी
हड्डियों में विकृति
बच्चों में शारीरिक विकास रुक जाना
रक्त में क्रिएटिनिन स्तर का बढ़ जाना
डायबिटीज से जुड़ी गुर्दा समस्याएं
किसके पास जाना चाहिए — नेफ्रोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट?
यदि आपकी समस्या गुर्दे की कार्यक्षमता से जुड़ी है जैसे कि क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), डायबिटिक नेफ्रोपैथी, या आपको डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है — तो नेफ्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए। ये विशेषज्ञ दवाओं के माध्यम से उपचार करते हैं और डायलिसिस व ट्रांसप्लांट की योजना बनाते हैं।
अगर लक्षण गुर्दे की संरचना से संबंधित हैं जैसे — गुर्दे में पथरी (स्टोन), प्रोस्टेट की समस्या, पेशाब में जलन या रुकावट, तो इनका इलाज यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग सर्जन) करते हैं। इन मामलों में सर्जरी या एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं आवश्यक हो सकती हैं।
इलाज में एडवांसमेंट
डॉ. शर्मा बताते हैं कि आज दवाओं में अत्याधुनिक विकास हुआ है। SGLT2 inhibitors (जैसे कि डैपाग्लिफ्लोज़िन, एम्पाग्लिफ्लोज़िन) एवं इम्यूनो सप्रेजेंट्स से डायबिटीज और किडनी दोनों की बीमारियों में बेहतर नियंत्रण संभव हो गया है। यह दवाएं क्रिएटिनिन को स्थिर रखने और किडनी फेलियर की प्रगति को धीमा करने में बेहद कारगर हैं।



