विशेष
चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे है न्यू एडवांस
cancer / कैंसरurology

किडनी स्टोन का उपचार अब पहले जैसा नहीं रहा: लेजर तकनीक ने बदल दी सर्जरी की परिभाषा

dr deepesh kalra। urologist। kidney। stone

किडनी स्टोन का उपचार अब पहले जैसा नहीं रहा: लेजर तकनीक ने बदल दी सर्जरी की परिभाषा

पिछले एक दशक में किडनी स्टोन के उपचार के क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान ने क्रांतिकारी प्रगति की है। एक समय था जब गुर्दे की पथरी के लिए पारंपरिक ‘ओपन सर्जरी’ यानी कट पद्धति अपनाई जाती थी, जिसमें शरीर पर बड़ा चीरा लगाना पड़ता था। फिर समय के साथ मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का आगमन हुआ, जिसमें छोटे चीरे से दूरबीन के माध्यम से सर्जरी की जाने लगी। लेकिन आज, आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से बिना किसी चीरे के भी किडनी स्टोन का सफल इलाज संभव हो गया है।

अग्रवाल हॉस्पिटल, जयपुर के सुप्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपेश कालरा (गोल्ड मेडलिस्ट) का कहना है कि, “आज भी लोगों में किडनी स्टोन को लेकर कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। कुछ लोग मानते हैं कि छोटी पथरी बियर पीने से निकल जाती है, या बीज वाली सब्जियां पथरी का कारण बनती हैं, इसलिए बिना बीज वाली सब्जियों पर निर्भर हो जाते हैं। वहीं कुछ लोग तथाकथित ‘चूर्ण’ या घरेलू दवाओं से पथरी के अपने-आप टूटने की बात करते हैं, जो पूरी तरह मिथक है।”

डॉ. कालरा के अनुसार, पथरी एक ठोस रासायनिक संरचना होती है, जिसे बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि आज लेजर तकनीक, RIRS (Retrograde Intrarenal Surgery) और PCNL (Percutaneous Nephrolithotomy) जैसी विधियों से अत्यंत सटीक, सुरक्षित और दर्दरहित उपचार संभव हो पाया है। इन तकनीकों में मरीज को ज्यादा दिन अस्पताल में भी नहीं रहना पड़ता।

किडनी स्टोन के लक्षण और चेतावनी संकेत

गुर्दे की पथरी के आम लक्षणों में कमर के दोनों ओर दर्द, मिचली, उल्टी, पेशाब करते समय जलन और दर्द शामिल हैं। यह दर्द अक्सर पीठ से होकर पेशाब की नली तक फैलता है। यदि पेशाब में खून आने लगे या बुखार हो जाए, तो यह गंभीर स्थिति मानी जाती है और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक होता है।

डॉ. कालरा बताते हैं कि यदि गुर्दे में पथरी 10 मिमी से अधिक की हो या यूरेटर (गुर्दे की नली) में 5 मिमी से बड़ी पथरी हो, तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है। इससे छोटी पथरियों को दवाओं, भरपूर पानी पीने और लाइफस्टाइल में बदलाव से निकालना संभव हो सकता है।

रोकथाम है संभव

डॉ. कालरा ने जानकारी दी कि औसतन 15-20% लोगों को अपने जीवनकाल में कभी-न-कभी किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है। इसलिए इससे बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, ऑक्सलेट और सोडियम युक्त आहार को नियंत्रित करना, और नियमित चेकअप कराना जरूरी है।

संपर्क सूत्र डॉ दीपेश कालरा मो 9509370455

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button