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आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक जीवन के बीच सेतु है ‘अपनी-अपनी रामायण’

आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक जीवन के बीच सेतु है ‘अपनी-अपनी रामायण’

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में संत-महात्माओं, विद्वानों एवं चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति में डॉ. दिनेश माथुर की पुस्तक का भव्य विमोचन

जयपुर, 18 अक्टूबर 2026

“रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, मानवीय संबंधों की मर्यादा और समाज को सही दिशा देने वाला शाश्वत मार्गदर्शन है।” इसी संदेश के साथ रविवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं लेखक डॉ. दिनेश माथुर की पुस्तक ‘अपनी-अपनी रामायण’ का विमोचन समारोह श्रद्धा, आध्यात्मिक वातावरण एवं विद्वत्जनों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

वैदिक मंगलाचरण एवं भक्तिमय शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आशुतोष अत्रे एवं पं. सुभाष शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन एवं वैदिक स्वस्तिवाचन के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। प्रारंभ में डॉ. वीणा आचार्य, डॉ. उमा गौतम, डॉ. सोनल गौर एवं डॉ. तरु छाया द्वारा गणेश वादन प्रस्तुत किया गया।

“शैली कोई भी हो, रामकथा का संदेश सदैव मधुर रहता है”

अपने प्रभावशाली उद्बोधन में पं. कौशलेंद्र शास्त्री ने रामायण की सार्वकालिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा:

“मिठाई चाहे गोल हो या चौकोर, उसका आकार कैसा भी हो, उसकी मिठास बनी रहती है। ठीक उसी प्रकार भगवान श्रीराम की कथा चाहे किसी भी शैली में कही जाए या किसी भी दृष्टिकोण से लिखी जाए, उसका मूल संदेश सदैव मधुर, कल्याणकारी और प्रेरणादायक रहता है।”

रामचंद्र मंदिर के प्रमुख महंत पं. नरेंद्र जी ने ईश्वर-भक्ति, सदाचार और आध्यात्मिक चिंतन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आध्यात्मिक साहित्य मनुष्य को उसके कर्तव्यों, नैतिक मूल्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य के प्रति जागरूक करता है।

लेखक का दृष्टिकोण : जीवन की चुनौतियों का समाधान भौतिकता में नहीं, संस्कारों में

स्वागत भाषण एवं पुस्तक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए लेखक डॉ. दिनेश माथुर ने अपने पाँच दशकों के चिकित्सीय, शैक्षणिक व सामाजिक अनुभवों को साझा किया। डॉ. माथुर ने कहा:

मानसिक तनाव का निदान : “हम शरीर की बीमारियों का उपचार करते हैं, लेकिन मनुष्य के जीवन में तनाव, अहंकार, असंतोष और संबंधों में बढ़ती दूरियों का उपचार अच्छे संस्कारों, संवेदनशीलता और जीवन-मूल्यों से ही संभव है।”

प्रासंगिक प्रस्तुतिकरण : पुस्तक का उद्देश्य रामकथा की पुनरावृत्ति मात्र नहीं, बल्कि इसके पात्रों और आदर्शों को वर्तमान जीवन की चुनौतियों से जोड़कर प्रस्तुत करना है।

आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आध्यात्मिक चिंतन का अनूठा समन्वय

डॉ. माथुर ने बताया कि पुस्तक में वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ के प्रसंगों को आधुनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक में क्वांटम सिद्धांत (Quantum Theory) और जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) जैसी आधुनिक तकनीकी व वैज्ञानिक अवधारणाओं के संदर्भ शामिल हैं।

इसका उद्देश्य वैज्ञानिक सिद्धांतों को धार्मिक घटनाओं का प्रमाण बताना नहीं, बल्कि आधुनिक पाठकों को एक नए दृष्टिकोण से विचार करने के लिए प्रेरित करना है।

चिकित्सा विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता

मानवीय मूल्य एवं सामाजिक दायित्व : महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के संस्थापक डॉ. एम. एल. स्वर्णकार ने पुस्तक के प्रयास की सराहना करते हुए जीवन में मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया।

मानसिक स्वास्थ्य पर चिंतन : वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. शिव गौतम ने मनुष्य के विचारों, भावनाओं, मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर बात की। इस दौरान आध्यात्मिक चिंतन और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध पर भी चर्चा हुई।

परोपकारी पहल : पुस्तक की बिक्री से सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता

पुस्तक की सह-लेखिका एवं वरिष्ठ स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. वीणा आचार्य ने पुस्तक के सामाजिक उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘अपनी-अपनी रामायण’ की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाओं में कैंसर, विशेषकर सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) की रोकथाम एवं जागरूकता से जुड़ी परोपकारी गतिविधियों में किया जाएगा।

सम्मान एवं धन्यवाद ज्ञापन

समारोह के दौरान लेखक डॉ. दिनेश माथुर ने सभी अतिथियों को दुप्पटा पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डॉ. उमा गौतम ने किया। अंत में सह-लेखिका डॉ. वीणा आचार्य ने उपस्थित सभी अतिथियों, विद्वानों व श्रोताओं का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि रामायण किसी एक युग, वर्ग या आयु तक सीमित नहीं है। यह पुस्तक नई पीढ़ी तक रामायण के आदर्शों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को पहुँचाने का एक अत्यंत सार्थक और सराहनीय प्रयास है।

सम्पर्क सूत्र डॉ दिनेश माथुर मो 9829061176

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