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बदलते समाज में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां : जयपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

बदलते समाज में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां : जयपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर सोशल साइकियाट्री’ (IASP) की वार्षिक नेशनल मिड-टर्म सीएमई (CME) 2026 का भव्य आयोजन किया गया।

“चेंजिंग सोसाइटी : रिशेपिंग मेंटल हेल्थ” विषय पर केंद्रित इस दो दिवसीय कार्यशाला में देशभर के प्रख्यात मनोचिकित्सकों ने बदलते सामाजिक परिवेश और मानसिक स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव पर मंथन किया।

दीप प्रज्वलन और उद्घाटन सत्र

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. दीपक माहेश्वरी और गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. राघव शाह ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। आयोजन अध्यक्ष डॉ. ललित बत्रा ने अपने स्वागत उद्बोधन में ‘सोशल डायलॉग’ की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे सामाजिक परिवर्तन मानसिक स्वास्थ्य के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के विचार :

तनावपूर्ण समाज और तकनीक का प्रभाव

सत्र के दौरान डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने कहा कि आज का परिदृश्य “मोस्ट स्ट्रेसफुल सोसाइटी” (सर्वाधिक तनावपूर्ण समाज) बन चुका है। उन्होंने जोर दिया कि :

स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी है।

टेक्नोलॉजी ने पूरी हेल्थ केयर प्रणाली को बदल दिया है।

अब बड़े संस्थानों में ‘मेंटल वेल-बीइंग’ (मानसिक कल्याण) के लिए अलग इकाइयां बननी शुरू हो गई हैं।

वैज्ञानिक सत्रों के मुख्य बिंदु

विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने समसामयिक विषयों पर साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) विचार प्रस्तुत किए:

सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य : एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों और डॉ. राघव शाह ने ‘प्रॉब्लेमैटिक सोशल मीडिया यूज’ और इसके समाधान पर प्रकाश डाला।

जलवायु परिवर्तन : डॉ. प्रेरणा शर्मा (एम्स, नई दिल्ली) ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय गिरावट का मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते प्रभाव के बारे में जानकारी दी।

जनरेशन गैप (Gen Z से Gen Alpha) : एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर ने पीढ़ीगत बदलावों और समाज पर उनके प्रभाव को विस्तार से समझाया।

डिजिटल प्रभाव : डॉ. रचना भार्गव (एम्स) और सपन जीत साहू के बीच बच्चों और किशोरों के लिए ‘डिजिटल वरदान या अभिशाप’ विषय पर सार्थक डिबेट हुई।

कार्यस्थल और एलजीबीटी अधिकार : विशेषज्ञों ने वर्कप्लेस डायनामिक्स और एलजीबीटी (LGBTQ+) अधिकारों से जुड़ी सामाजिक अपेक्षाओं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।

बुजुर्गों की समस्याएं : डॉ. रूप सिडाना, डॉ. तुषार जगावत और डॉ. सुनील सुथार ने भारतीय आबादी में बढ़ती उम्र (Aging Population) के सामाजिक परिणामों और उनके समाधानों पर विचार रखे।

प्रमुख उपस्थिति

इस अवसर पर डॉ. बसु, डॉ. नितिन गुप्ता, डॉ. ममता सूद, डॉ. विवेक अग्रवाल, डॉ. योगेश सतीजा, डॉ. संजय जैन, डॉ. सुनील शर्मा और डॉ. पार्थ सिंह सहित चिकित्सा जगत की कई विभूतियां उपस्थित रहीं।

कार्यशाला के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि कोविड के बाद सामाजिक ढांचा पूरी तरह बदल चुका है, जिसे देखते हुए सोशल साइकियाट्री के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

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