साहित्य का महाकुंभ : जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 19वें संस्करण का आगाज, जुड़ेंगे दुनिया भर के दिग्गज
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साहित्य का महाकुंभ : जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 19वें संस्करण का आगाज, जुड़ेंगे दुनिया भर के दिग्गज
जयपुर। दुनिया के सबसे बड़े मुफ्त साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) ने अपने 19वें वर्ष में प्रवेश करते ही साहित्य, कला और संवाद के एक नए अध्याय की घोषणा कर दी है। इस वर्ष का उत्सव न केवल समकालीन विषयों पर चर्चा का केंद्र बनेगा, बल्कि ‘टाइमलेस’ (कालजयी) विचारों को भी मंच प्रदान करेगा।
साझेदारी और सहयोग की नई ऊँचाइयां
टीमवर्क आर्ट्स की अध्यक्ष प्रीता सिंह ने उत्सव की सफलता में साझेदारों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने मुख्य प्रायोजक वेदांता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग ने फेस्टिवल को इस ऊंचाई तक पहुँचाया है। इस वर्ष इन्फोसिस फाउंडेशन, MSF फाउंडेशन, HSBC, और राजस्थान पर्यटन जैसे पुराने सहयोगियों के साथ-साथ Groww, पॉकेट FM, और प्रेस्टीज ग्रुप जैसे नए नाम भी इस वैचारिक यात्रा का हिस्सा बने हैं। प्रीता सिंह ने बताया कि विभिन्न मीडिया पार्टनर्स के माध्यम से इस महोत्सव की गूँज वैश्विक स्तर पर पहुँचाई जाएगी।
संवाद और संस्कृति का संगम
द लीला पैलेसेस, होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की कार्यकारी उपाध्यक्ष अंजलि मेहरा ने उत्सव के साथ जुड़ाव पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “लीला में हमारा मानना है कि असली विलासिता केवल सुंदर परिवेश में नहीं, बल्कि संवाद की समृद्धि और रचनात्मकता को पोषण देने में है।” उन्होंने JLF को एक ऐसा मंच बताया जो जिज्ञासा को प्रेरित करता है और दुनिया भर की आवाजों को एक साथ लाता है, जो उनके मेहमानों की पसंद के अनुरूप है।
पिंक सिटी के लिए गर्व का क्षण
जयपुर, जिसे हम प्यार से ‘पिंक सिटी’ कहते हैं, के लिए यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत का गौरव है।
वैश्विक पहचान : JLF ने जयपुर को दुनिया के ‘साहित्यिक मानचित्र’ पर सबसे ऊपर ला खड़ा किया है।
कला और विरासत का मेल : जब दुनिया भर के नोबेल और बुकर पुरस्कार विजेता जयपुर की गलियों और किलों की पृष्ठभूमि में चर्चा करते हैं, तो यह शहर की मेहमानन वाज़ी और बौद्धिक विरासत का लोहा पूरी दुनिया मानती है।
अर्थव्यवस्था और पर्यटन : इस महोत्सव के कारण जयपुर का पर्यटन और स्थानीय हस्तशिल्प वैश्विक पटल पर चमकता है, जो हर जयपुर वासी के लिए गर्व का विषय है।
यह फेस्टिवल जयपुर की उस ‘रॉयल’ पहचान में बौद्धिक गहराई जोड़ता है, जो इसे सही मायने में राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी बनाती है।


