टिटनेस का इंजेक्शन कब जरूरी है?
टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है और मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न का कारण बनती है। इस बीमारी से बचाव के लिए निम्स मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ राजेंद्र धर कहते है कि टिटनेस का इंजेक्शन एक महत्वपूर्ण उपाय है। इसका उपयोग केवल चोट लगने के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित टीकाकरण के एक हिस्से के रूप में भी किया जाता है।
आपको टिटनेस का इंजेक्शन कब लगवाना चाहिए?
गहरे घाव और चोट : जंग लगी हुई धातु, कील या किसी गंदी चीज से चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन तुरंत लगवाना चाहिए। गहरे घाव, जलने या कुचलने वाली चोटों में भी इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे मामलों में, चोट लगने के 24 घंटे के भीतर इंजेक्शन लगवाना सबसे अच्छा होता है।
नियमित टीकाकरण : बच्चों को बचपन में ही टिटनेस का टीका लगाया जाता है, जो आमतौर पर डिप्थीरिया और पर्टुसिस के टीकों के साथ दिया जाता है (DTaP)। यह टीका 2, 4, 6 महीने की उम्र में और फिर 15-18 महीने और 4-6 साल की उम्र में दिया जाता है।
वयस्कों के लिए बूस्टर डोज : वयस्कों को हर 10 साल में एक बूस्टर डोज लेने की सलाह दी जाती है ताकि बीमारी से सुरक्षा बनी रहे। यदि किसी को गहरा घाव लगता है और उसके बूस्टर डोज को 5 साल से अधिक हो गए हैं, तो उसे अतिरिक्त बूस्टर लेने की आवश्यकता हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान : गर्भवती महिलाओं को भी टिटनेस का टीका लगाया जाता है ताकि मां और नवजात शिशु दोनों को टिटनेस से बचाया जा सके।
जानवर के काटने पर : किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत प्राथमिक उपचार के बाद टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है।
टिटनेस के लक्षण और इलाज :
टिटनेस के लक्षणों में जबड़े का अकड़ना, सिरदर्द, बुखार, निगलने में कठिनाई और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं। टिटनेस होने के बाद भी लोगों को टिटनेस का टीका दिया जाता है ताकि भविष्य में इसका दोबारा संक्रमण न हो।
टिटनेस से बचाव के लिए सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। अगर आपको किसी भी तरह की चोट लगती है, खासकर अगर वह गंदी या गहरी है, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें और टिटनेस का इंजेक्शन लगवाएं।
संपर्क सूत्र : डॉ राजेंद्र धर मो 9414073962


