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ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी – प्रकार, चुनौतियाँ और आधुनिक उपचार
Dr g s kalra। plastic surgeon। sms

ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी – प्रकार, चुनौतियाँ और आधुनिक उपचार
आम जन में अभी भी ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी के बारे में पता नहीं है इस बारे में एसएमएस मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर जी एस कालरा का कहना है कि
ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है:
1. जन्मजात पक्षाघात (Birth Palsy / Obstetric Brachial Plexus Injury)
यह चोट प्रसव के दौरान होती है, प्रायः तब जब शिशु के कंधे या गर्दन पर अधिक खिंचाव पड़ता है। इसके कारण अर्ब्स पाल्सी (Erb’s Palsy – ऊपरी नसों की चोट) या क्लम्पकी पाल्सी (Klumpke’s Palsy – निचली नसों की चोट) हो सकती है। समय पर पहचान और उचित उपचार, जैसे कि फिजियोथैरेपी और ज़रूरत पड़ने पर माइक्रोसर्जरी, से इलाज संभव है।
2. आघातजन्य ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी (Post-traumatic Brachial Plexus Injury)
यह अधिकतर सड़क दुर्घटनाओं, विशेषकर मोटरसाइकिल दुर्घटनाओं, ऊँचाई से गिरने या तेज़ चोट लगने के कारण होती है। इसमें नसें खिंच सकती हैं, फट सकती हैं, या रीढ़ की हड्डी से पूरी तरह उखड़ सकती हैं। रोगी में बांह की कमजोरी, संवेदनशीलता की कमी, या पूरी तरह से हाथ लटक जाने जैसी समस्या हो सकती है।
चिंताजनक सलाह भी
समय पर उपचार का बहुत महत्व है
डॉ कालरा ने कहा कि इन सभी प्रकार की पैरालिसिस में समय पर सही उपचार मिलना अत्यंत आवश्यक है। दुर्भाग्यवश, पूर्ण जानकारी न होने के कारण, अक्सर फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और फिजियोथैरेपिस्ट इन रोगियों को लंबे समय तक केवल फिजियोथैरेपी या प्रतीक्षा के सहारे रखते हैं, यह सोचकर कि रोगी अपने आप ठीक हो जाएगा।
वास्तव में, यदि चोट के तीन महीने बाद भी हाथ में आवश्यक मूवमेंट वापस नहीं आता है, तो तीसरे महीने के आसपास ब्रैकियल प्लेक्सस की सर्जिकल जांच (Exploration) करनी चाहिए। इस दौरान जो नसें टूटी या क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें जोड़ना या उनकी जगह नर्व ग्राफ्ट/नर्व ट्रांसफर करना चाहिए, ताकि रिकवरी का अधिकतम अवसर मिल सके। समय बढ़ने के साथ नसों की पुनः वृद्धि की क्षमता घटती जाती है और परिणाम कमजोर हो जाते हैं।
आधुनिक उपचार एक अच्छा विकल्प
आज चिकित्सा विज्ञान में कई उन्नत तकनीकें उपलब्ध हैं :
नर्व रिपेयर और ग्राफ्टिंग – आंशिक चोट और स्वस्थ नर्व एंड्स होने पर।
नर्व ट्रांसफर – अन्य नसों (जैसे स्पाइनल एक्सेसरी, इंटरकोस्टल नर्व) का उपयोग।
फ्री फंक्शनल मसल ट्रांसफर – लंबे समय से चली आ रही या असफल रिकवरी वाले मामलों में।
सटीक समय – सभी मामलों में 3–6 महीने के भीतर सर्जरी सर्वश्रेष्ठ परिणाम देती है।
पुनर्वास – ऑपरेशन के बाद नियमित फिजियोथैरेपी और ऑक्युपेशनल थेरेपी अनिवार्य है।
संदेश :
सभी चिकित्सकों—चाहे वे गाँव के एमबीबीएस डॉक्टर हों, न्यूरोलॉजिस्ट हों, या किसी अन्य विशेषज्ञता से हों—को ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी के समय-निर्धारण और उपचार के बारे में जागरूक होना चाहिए। सही समय पर सही सर्जरी और पुनर्वास के द्वारा, रोगी का हाथ कार्यात्मक रूप से पूरी तरह या आंशिक रूप से पुनः सक्रिय किया जा सकता है, और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा सकता है।
संपर्क सूत्र डॉ जी एस कालरा मो 982-905-0655


