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बुखार: संक्रमण से लड़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया : डॉ. राजेन्द्र धर, वरिष्ठ फिजिशियन, निम्स हॉस्पिटल

बुखार: संक्रमण से लड़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया :

डॉ. राजेन्द्र धर, वरिष्ठ फिजिशियन, निम्स हॉस्पिटल

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, जयपुर

98.6°F से अधिक तापमान हो तो सावधान हो जाएं

डॉ. राजेन्द्र धर का संदेश:

“बुखार को केवल रोग समझना भूल हो सकती है। यह शरीर की एक चेतावनी है – जो समय पर पहचानकर उचित उपचार से गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकती है।”

निम्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं प्रख्यात फिजिशियन डॉ. राजेन्द्र धर बताते हैं कि मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.6°F (37°C) होता है। यदि यह तापमान इससे अधिक बढ़ता है तो उसे बुखार (Pyrexia) कहा जाता है, जो संक्रमण के विरुद्ध शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।

बुखार: शरीर का सुरक्षा कवच

डॉ. धर के अनुसार, जब शरीर में किसी भी प्रकार का संक्रमण होता है, तो रक्त एवं लसीका प्रणाली सक्रिय होकर सफेद रक्त कोशिकाएँ (WBC) उत्पन्न करती हैं। ये कोशिकाएं शरीर में घुसे रोगाणुओं से लड़ती हैं। इस प्रक्रिया में शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और व्यक्ति को कंपकंपी महसूस होती है।

तापमान की ऊपरी सीमा क्या है?

आमतौर पर शरीर का तापमान 41–42°C (105.8–107.6°F) से ऊपर नहीं जाता। इस दौरान व्यक्ति को ठंडी लहरें, थकावट और कमजोरी अनुभव हो सकती है।

बुखार के कारण क्या हो सकते हैं?

संक्रमणजन्य कारण :

वायरल इंफेक्शन (जैसे – सर्दी-जुकाम)

बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे – मूत्र संक्रमण, मेनिनजाइटिस)

परजीवी जनित रोग (जैसे – मलेरिया)

एपेन्डिसाइटिस

गैर-संक्रमणजन्य कारण :

वस्क्युलिटिस

डीप वेन थ्रॉम्बोसिस

दवाओं के दुष्प्रभाव

कैंसर इत्यादि

हाइपरथर्मिया और बुखार में फर्क समझें

डॉ. धर ने बताया कि हाइपरथर्मिया और बुखार अलग-अलग स्थितियाँ हैं। हाइपरथर्मिया तब होता है जब शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है – जैसे गर्म वातावरण में या अत्यधिक परिश्रम के कारण – और शरीर उसे बाहर नहीं निकाल पाता। जबकि बुखार शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रतिक्रिया का हिस्सा होता है।

बुखार में अपनाएं ये घरेलू उपाय (Home Remedies):

1. गुनगुना पानी पीते रहें: शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए हाइड्रेशन ज़रूरी है।

2. तुलसी का काढ़ा: तुलसी में एंटीवायरल गुण होते हैं। काढ़ा बनाकर दिन में 2-3 बार पिएं।

3. ठंडी पट्टी: माथे पर गीली कपड़े की पट्टी रखने से तापमान घटाने में मदद मिलती है।

4. हल्का और सुपाच्य भोजन: दलिया, खिचड़ी, सूप जैसे खाने लें।

5. पर्याप्त आराम: शरीर को रिकवरी के लिए पूरा आराम देना जरूरी है।

6. नीम और गिलोय का सेवन: गिलोय इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार होता है।

मेडिकल ट्रीटमेंट क्या है ? (चिकित्सकीय उपचार):

पैरासिटामोल (Paracetamol): हल्के से मध्यम बुखार में तापमान कम करने के लिए प्रयोग होता है।

एंटीबायोटिक दवाएं: यदि संक्रमण बैक्टीरियल है तो डॉक्टर की सलाह से उपयोग की जाती हैं।

ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट: संक्रमण के प्रकार को पहचानने के लिए।

IV Fluids: अधिक तापमान और निर्जलीकरण की स्थिति में अस्पताल में दी जाती है।

हॉस्पिटल एडमिशन: यदि बुखार 3-4 दिनों से अधिक बना रहे या तेज़ हो, तो भर्ती ज़रूरी हो सकता है।


बुखार में क्या नहीं करना चाहिए (Things to Avoid During Fever):

डॉ. राजेन्द्र धर सलाह देते हैं कि बुखार के दौरान कुछ आम गलतियाँ स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। इसलिए निम्नलिखित बातों से बचें:

1. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना: हर बुखार का कारण बैक्टीरियल नहीं होता। खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है।

2. बर्फ या बहुत ठंडे पानी से स्नान: अचानक शरीर को ठंडा करने की कोशिश से शरीर में झटका लग सकता है और कंपकंपी बढ़ सकती है।

3. ज्यादा कपड़े पहनना या रजाई ओढ़ना: शरीर को जरूरत से ज्यादा गर्म रखना तापमान और बढ़ा सकता है।

4. तेज मसालेदार भोजन: यह पाचन पर बोझ डालता है और शरीर की ऊर्जा लड़ाई की बजाय पाचन में लगती है।

5. व्यायाम या शारीरिक मेहनत: बुखार में शरीर को पूरी तरह आराम देना जरूरी होता है।

6. बुखार को नज़रअंदाज़ करना: लगातार 3 दिन से अधिक बुखार रहने पर मेडिकल सलाह जरूर लें।

7. खुद को ‘ठंड लग रही है’ सोचकर ओवररीएक्ट करना: कंपकंपी शरीर के तापमान बढ़ाने का संकेत है, न कि केवल ठंड का।

संपर्क सूत्र:

डॉ. राजेन्द्र धर

वरिष्ठ फिजिशियन, निम्स हॉस्पिटल

मो. 9414073962

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