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dermatology / चर्मरोग

त्वचा : केवल शरीर की सतह नहीं, बल्कि भावनाओं का दर्पण । डर्माकॉन 2025: चिकित्सा नैतिकता, प्रेरणा और त्वचा विज्ञान की गहराई पर एक विचारोत्तेजक व्याख्यान

dermacon 2025। dr dinesh mathur। dermatologist

डर्माकॉन 2025 : चिकित्सा नैतिकता, प्रेरणा और त्वचा विज्ञान की गहराई पर एक विचारोत्तेजक व्याख्यान

जयपुर | डर्माकॉन 2025 के उद्घाटन से पूर्व आयोजित ‘आइस-ब्रेकिंग’ सत्र में मुख्य वैज्ञानिक संयोजक डॉ. दिनेश माथुर ने एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया, जो चिकित्सा नैतिकता, त्वचा विज्ञान और प्रेरणा के विज्ञान पर केंद्रित था। इस अवसर पर डर्माकॉन 2025 के अध्यक्ष डॉ. मंजुनाथ शिनॉय, सचिव डॉ. भोमेश कट्टकम, आयोजन अध्यक्ष डॉ. यू.एस. अग्रवाल, आयोजन सचिव डॉ. दीपक माथुर सहित समस्त फैकल्टी सदस्य उपस्थित थे।

डॉ. दिनेश माथुर, जो जयपुर और भारत में एक प्रतिष्ठित त्वचा रोग विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं, ने अपने 50 वर्षों से अधिक के नैदानिक और शिक्षण अनुभव को साझा किया और चिकित्सा जगत के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान, नैतिकता और व्यक्तिगत विकास के आपसी संबंधों को उजागर करते हुए युवा चिकित्सकों और चिकित्सा पेशेवरों को ईमानदारी, सतत शिक्षा और करुणा के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।

प्रेरणा के वैज्ञानिक आधार पर गहन विश्लेषण

डॉ. माथुर ने प्रेरणा के वैज्ञानिक आधार को समझाते हुए बताया कि डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर हमारे जुनून, मानसिक मजबूती और मानवीय जुड़ाव को प्रभावित करते हैं। उन्होंने समझाया कि स्वस्थ भोजन, व्यायाम, सामाजिक संपर्क और शिक्षा से प्रेरणा को स्वाभाविक रूप से बढ़ाया जा सकता है और शराब व बाहरी उत्तेजनाओं की बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाना आवश्यक है।

त्वचा : केवल शरीर की सतह नहीं, बल्कि भावनाओं का दर्पण

उन्होंने त्वचा को केवल शरीर की सतह के रूप में देखने के बजाय, उसे भावनाओं, जीवन के अनुभवों और संघर्षों का दर्पण मानने का संदेश दिया। झुर्रियों को उम्र का निशान नहीं, बल्कि अनुभव और संघर्ष की पहचान के रूप में स्वीकार करने की बात कही।

चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं बल्कि चिकित्सा नैतिकता और डॉक्टर की जिम्मेदारी

डॉ. माथुर ने कहा, “चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा और आह्वान (Calling) है।” उन्होंने चिकित्सा में नैतिकता, सत्यनिष्ठा और विश्वास को डॉक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण मूल्य बताया। उन्होंने रामायण के सुषेन वैद्य का उदाहरण देते हुए समझाया कि चिकित्सा सेवा में जाति, धर्म, मित्रता या शत्रुता का कोई स्थान नहीं होता, बल्कि चिकित्सक का कर्तव्य सबसे पहले आता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “एक सच्चे चिकित्सक की सफलता केवल व्यावसायिक लाभ में नहीं, बल्कि मरीजों की भलाई और सही शिक्षा देने में निहित होती है।”

मरीजों के आत्म-सम्मान की पुनर्स्थापना ही सच्ची चिकित्सा है।

उन्होंने युवा चिकित्सकों को प्रेरित किया कि चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों के आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया भी है।

उन्होंने कहा, “सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। चिकित्सा केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और परेशानियों को समझकर उनके आत्म-सम्मान को बहाल करने की प्रक्रिया भी है।”

डर्माकॉन 2025 के लिए एक नई प्रेरणा और प्रतिबद्धता

इस प्रेरणादायक व्याख्यान के माध्यम से चिकित्सा पेशेवरों को यह संदेश दिया गया कि सच्चा उपचार केवल शारीरिक लक्षणों का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज की भावनाओं और आंतरिक पहलुओं को समझना भी है।

वास्तविक जीवन की कहानियों, वैज्ञानिक तथ्यों और नैतिक मूल्यों के संयोजन से डॉ. दिनेश माथुर का यह सत्र चिकित्सा जगत के लिए एक नई प्रेरणा और प्रतिबद्धता लेकर आया। डर्माकॉन 2025 का यह सत्र न केवल एक सम्मेलन का हिस्सा था, बल्कि एक विचारधारा थी, जो चिकित्सा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

contact number dr dinesh mathur 9829061176

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