ब्रूसेलोसिस : पशुओं को होने वाली बीमारी फैली इंसानों में

ब्रूसेलोसिस : पशुओं को होने वाली बीमारी फैली इंसानों में
ब्रूसेलोसिस : पशुओं से फैलने वाला जूनोटिक संक्रमण
ब्रूसेलोसिस एक जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) संक्रमण है, जो ब्रूसेला जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे पालतू पशुओं के जरिए इंसानों में फैलती है।
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संक्रमण के मामले : 2024 में राजस्थान में 401 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से 153 अकेले जयपुर से हैं। अन्य प्रभावित जिलों में अलवर और दौसा भी शामिल हैं। बाकी जिलों में भरतपुर बीकानेर करौली सवाई माधोपुर धौलपुर सीकर झुंझुनू में भी ब्रूसेलोसिस के संक्रमण पाए गए हैं ब्रूसेलोसिस से संक्रमण की बीमारी के अलावा राज्य में डेंगू मलेरिया स्क्रब टाइफस के साथ चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के भी मामले दर्ज हुए हैं इन बीमारियों से राज्य में 16 मौतें हुई हैं।
पशुओं की उचित देखभाल में कमी : भारत में पशुपालन एक प्रमुख व्यवसाय है, जिसकी वजह से यह संक्रमण तेजी से फैलने की संभावना बढ़ जाती है। संक्रमित पशुओं के दूध, मांस या उनके सीधे संपर्क में आने से इंसानों में संक्रमण फैलता है।
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कैसे फैलता है ब्रूसेलोसिस ?
1. संक्रमित पशुओं के संपर्क से :
संक्रमित पशुओं के खून, दूध, मूत्र, गर्भपात से निकले तरल पदार्थ, और प्लेसेंटा के संपर्क में आने से।
2. अप्रसंस्कृत दूध और डेयरी उत्पादों से :
कच्चे या अधपके दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन।
3. संक्रमित माँ से शिशु को :
ब्रेस्टफीडिंग के माध्यम से।
4. पशु चिकित्सकों और खेत मजदूरों को :
संक्रमित पशुओं के साथ काम करने वाले लोग उच्च जोखिम में होते हैं।
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क्या है बीमारी के लक्षण :
ब्रूसेलोसिस के लक्षण संक्रमण के 1-4 हफ्तों के भीतर दिखाई देते हैं:
बुखार (आवर्तक बुखार जो बार-बार आता है और जाता है)
भूख कम लगना
थकान और कमजोरी
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
त्वचा पर लाल चकत्ते
अंगों में सूजन (जैसे हृदय, यकृत, और तिल्ली)
गंभीर मामलों में, संक्रमण हड्डियों और मस्तिष्क तक भी फैल सकता है।
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क्या है इलाज और रोकथाम के तरीके :
1. इलाज :
ब्रूसेलोसिस का इलाज एंटीबायोटिक्स (डॉक्सीसाइक्लिन, रिफाम्पिसिन) के माध्यम से किया जाता है। इलाज की अवधि 6-8 हफ्तों तक हो सकती है।
गंभीर मामलों में लंबे समय तक एंटीबायोटिक थेरेपी की आवश्यकता होती है।
2. रोकथाम के उपाय :
संक्रमित पशुओं का उचित प्रबंधन और स्वास्थ्य देखभाल हो।
संक्रमित पशुओं की पहचान और अलगाव।
पशुओं का नियमित टीकाकरण और जांच।
इंसानों को सुरक्षित डेयरी उत्पादों का सेवन करना चाहिए कच्चे दूध और अधपके मांस का सेवन न करें।
सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें :
पशु पालकों और चिकित्सकों को ग्लव्स, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें :
पशुओं के रहने वाली जगह को साफ रखना और संक्रमित पदार्थों को ठीक से नष्ट करना।
जनजागरूकता जरूरी :
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को ब्रूसेलोसिस के खतरे और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना।
भारत में अन्य जूनोटिक बीमारियां
1. लेप्टोस्पायरोसिस: चूहों या संक्रमित जानवरों के मूत्र से फैलती है।
2. रैबीज: संक्रमित पशुओं के काटने से होती है।
3. एंथ्रैक्स: संक्रमित पशुओं के संपर्क या उनके मांस से फैलता है।
4. बर्ड फ्लू: पक्षियों से इंसानों में फैलने वाला वायरस संक्रमण।
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भारत में ब्रूसेलोसिस पर नियंत्रण की चुनौतियां निम्न। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी।
पशुओं का अनियमित टीकाकरण।
स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
सरकार और चिकित्सा विभाग द्वारा ब्रूसेलोसिस के नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग के साथ समन्वय कर संक्रमण रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।