परथेनियम घास से त्वचा रोगों की रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान। व्यायाम और सही आहार ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय खतरों से बचाव जरूरी :

परथेनियम घास से त्वचा रोगों की रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान। व्यायाम और सही आहार ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय खतरों से बचाव जरूरी :
जयपुर : परथेनियम हिस्टेरोफोरस, जिसे आम भाषा में “गाजर घास” के नाम से जाना जाता है, पूरे देश में व्यापक रूप से फैली हुई एक जहरीली खरपतवार है। यह न केवल जैव विविधता और कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, बल्कि त्वचा रोगों (डर्माटाइटिस) सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनती है। इस विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए “कॉन्टैक्ट एंड ऑक्यूपेशनल डर्माटोसिस फोरम ऑफ इंडिया” के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश माथुर द्वारा राजस्थान अस्पताल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
साइक्लोथॉन रैली द्वारा जन-जागरूकता अभियान :
कार्यक्रम के अंतर्गत, पुणे स्थित साइक्लिस्टों की एक विशेष टीम ने उदयपुर से जयपुर तक साइक्लोथॉन रैली आयोजित की, जिसका नेतृत्व प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र पटवर्धन ने किया।
परथेनियम घास और इसके दुष्प्रभाव :
परथेनियम हिस्टेरोफोरस एक आक्रामक खरपतवार है, जो भारत में हरित क्रांति के दौरान गलती से आयात की गई थी और अब पूरे देश में व्यापक रूप से फैल चुकी है। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है और कई एलर्जिक और त्वचा रोगों का कारण बनती है।
त्वचा पर कौन कौन से दुष्प्रभाव पड़ते है
1. एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस – घास के संपर्क में आने से त्वचा में खुजली, लाल चकत्ते, और फफोले हो सकते हैं।
2. फोटो-डर्माटाइटिस – सूर्य के संपर्क में आने पर घास के कण त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देते हैं, जिससे जलन और सूजन हो सकती है।
3. एटोपिक डर्माटाइटिस – लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा पर लगातार खुजली और सूखापन की समस्या हो सकती है।
4. एयरबोर्न कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस – घास के सूक्ष्म कण हवा में उड़कर त्वचा के संपर्क में आकर एलर्जी और खुजली उत्पन्न कर सकते हैं।
इसके अलावा, परथेनियम के पराग कण श्वसन तंत्र को प्रभावित कर दमा, ब्रोंकाइटिस, और अन्य श्वसन समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।
डॉ. एस.एस. अग्रवाल द्वारा पोस्टर विमोचन एवं सम्मान समारोह :
कार्यक्रम के दौरान, राजस्थान अस्पताल के चेयरमैन, पूर्व IMA अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), जोधपुर के निदेशक, डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने परथेनियम उन्मूलन पर एक जागरूकता पोस्टर जारी किया। साथ ही, साइक्लोथॉन के पार्टिसिपेंट को राजस्थान की पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मान स्वरूप “बैज ऑफ ऑनर” प्रदान किया गया।
व्यायाम और सही आहार ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय खतरों से बचाव जरूरी :
कार्यक्रम के दौरान डॉ. दिनेश माथुर ने परथेनियम घास के स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी और इसके उन्मूलन के लिए जन-सहभागिता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार और आम जनता को मिलकर इस घातक खरपतवार को नष्ट करने हेतु प्रयास करने चाहिए, ताकि इससे होने वाले त्वचा और श्वसन रोगों से बचा जा सके।
इस अवसर पर डॉ. नरेंद्र पटवर्धन ने कहा कि “स्वस्थ जीवनशैली के लिए केवल व्यायाम और सही आहार ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय खतरों से बचाव भी जरूरी है। परथेनियम घास जैसी खतरनाक वनस्पतियों को हटाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
सम्मान और पुरस्कार वितरण
कार्यक्रम के समापन अवसर पर, डॉ. एस.एस. अग्रवाल द्वारा सभी साइक्लिस्टों को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
संदेश यह है कि :
यह कार्यक्रम परथेनियम घास के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने और इसके प्रभावी उन्मूलन के लिए सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था। त्वचा रोगों की रोकथाम के साथ एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
संपर्क सूत्र : डॉ दिनेश माथुर मो 9829061176