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सोच बदलनी होगी

सोच बदलनी होगी। महिला अबला नहीं, अजेय है — यही सत्य है, और यही भविष्य की नींव है

सोच बदलनी होगी: नारी की शक्ति और महत्ता का पुनः आकलन

सोच बदलनी होगी। महिला अबला नहीं, अजेय है — यही सत्य है, और यही भविष्य की नींव है

हमारे समाज में महिलाओं को लंबे समय तक अबला, कमजोर और सहारा पाने वाली के रूप में देखा गया। इस धारणा को बदलने का समय आ गया है। महिला दिवस जैसे विशेष दिनों की शुरुआत इसलिए हुई थी ताकि महिलाओं को उनकी शक्ति और सामर्थ्य का एहसास कराया जा सके। लेकिन क्या यह सही नहीं होगा कि अब हम यह मान लें कि महिलाएं न केवल सक्षम हैं, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर चुकी हैं?

आज महिलाएं अंतरिक्ष में जा चुकी हैं, सेना की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं, वैज्ञानिक खोजों में आगे हैं, और बड़े-बड़े कारोबार संभाल रही हैं। फिर भी उन्हें अबला या कमजोर समझना, उनकी वास्तविकता को नकारने जैसा है। महिलाओं को अब अपनी छवि कच्ची मिट्टी की तरह कोमल और कमजोर नहीं रखनी चाहिए, बल्कि अपनी शक्ति और दृढ़ता का परिचय देना चाहिए।

घर के संचालन से लेकर समाज के हर क्षेत्र में, अगर महिलाएं एकजुट होकर कदम बढ़ाएं, तो कोई भी शक्ति उनके विरुद्ध खड़ी नहीं हो सकती। एक मां अपने बच्चे का पालन-पोषण करती है, उसे संस्कार देती है, समाज का भविष्य गढ़ती है — ऐसी शक्ति के खिलाफ जाने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता।

कन्या भ्रूण हत्या जैसी अमानवीय प्रथाएं तभी कम हुई हैं जब समाज ने महिला की वास्तविक शक्ति को पहचाना। अब जब महिलाएं आत्मनिर्भर और सशक्त हो चुकी हैं, तब कोई यह तय नहीं कर सकता कि वह क्या कर सकती हैं और क्या नहीं। जो महिलाएं अपने सपनों को कुचलकर, दहेज की बलि चढ़कर, सबको खुश करने की कोशिश में अपनी खुशी और सेहत को भी दांव पर लगा देती हैं — वे कभी कमजोर नहीं हो सकतीं। यह त्याग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

 

बेटियों को पंख देने की जिम्मेदारी खुद महिलाओं पर है।

उन्हें वही पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी, जब दूसरी महिलाएं भी उन्हें उड़ने के लिए प्रेरित करेंगी। महिलाओं को खुद आगे आकर यह दिखाना होगा कि

वे न केवल सहनशील हैं, बल्कि संपूर्ण समर्थ और शक्तिशाली हैं।

सोच बदलनी होगी। महिला अबला नहीं, अजेय है — यही सत्य है, और यही भविष्य की नींव है

अब समाज को यह समझना होगा कि महिला मात्र संवेदना का प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, धैर्य और साहस की जीती-जागती मूर्ति है। उनकी महत्ता केवल परिवार और समाज तक सीमित नहीं है — वे दुनिया को नई दिशा देने में सक्षम हैं।

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